बिहार बन रहा वाइल्डलाइफ टूरिज्म हब, बाघ, डॉल्फिन, सफारी व पक्षी विहार देखने बड़ी संख्या में पहुंच रहे पर्यटक

पटना : बिहार के टाइगर रिजर्व, डॉल्फिन अभ्यारण्य, वन्यजीव अभ्यारण्य और सफारी अब इको टूरिज्म के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं। राज्य के विभिन्न वन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पर्यटक वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के लिए पहुंच रहे हैं। पश्चिम चंपारण स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व राज्य का एकमात्र टाइगर रिजर्व है, जो लगभग 901 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यहां बंगाल टाइगर, तेंदुआ, भालू, हिरण, नीलगाय, जंगली बिल्ली और 250 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। घने जंगल, पहाड़ियां और नदियों से घिरा यह क्षेत्र वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास का अनुभव प्रदान करता है।

भागलपुर जिले में स्थित विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभ्यारण्य गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है

भागलपुर जिले में स्थित विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभ्यारण्य गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। लगभग 60 किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस अभ्यारण्य में पर्यटक नाव के माध्यम से डॉल्फिन को प्राकृतिक रूप को देखने आते हैं। मुंगेर जिले का भीमबांध वन्यजीव अभ्यारण्य वन्यजीव पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां बाघ, तेंदुआ, जंगली सूअर, भालू, सांभर, चीतल और कई अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं। पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों के लिए उपयुक्त स्थल है।

नालंदा जिले में स्थित राजगीर नेचर सफारी और राजगीर जू सफारी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं

नालंदा जिले में स्थित राजगीर नेचर सफारी और राजगीर जू सफारी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। यहां पर्यटक सफारी के माध्यम से बाघ, शेर, भालू, हिरण और अन्य वन्यजीवों को नजदीक से देख सकते हैं। राजगीर का ग्लास स्काई वॉक भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। पश्चिम चंपारण का उदयपुर वन्यजीव अभ्यारण्य पक्षी प्रेमियों के लिए प्रमुख स्थल है। यहां पर्यटक विभिन्न प्रकार के स्थानीय और प्रवासी जल पक्षियों को देखने आते हैं।

इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है और वन्यजीव संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है

कैमूर जिले में स्थित कैमूर वन्यजीव अभ्यारण्य राज्य का सबसे बड़ा वन्यजीव अभ्यारण्य है, जो 1500 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला है। यहां चिंकारा, नीलगाय, सांभर, चीतल, भालू और तेंदुए सहित कई वन्यजीव पाए जाते हैं। वन विभाग और पर्यटन विभाग की ओर से इन वन्यजीव क्षेत्रों में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए सड़क, सफारी, गाइड, सुरक्षा और ठहरने जैसी सुविधाओं का लगातार विकास किया जा रहा है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है और वन्यजीव संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है।

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