Ranchi: रांची में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करवाने वाली बायोम इंस्टीट्यूट की ओर से रविवार को पेरेंट्स स्टूडेंट्स ओरिएंटेशन 2026 का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम गुरुनानक स्कूल के सभागार में आयोजित किया गया. जिसमें 25 बैच के 1500 से ज्यादा छात्र छात्राएं और अभिभावक शामिल हुए. जिससे पूरे आयोजन स्थल पर उत्साह, ऊर्जा और उम्मीद का माहौल बना रहा.
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई. इसके बाद विद्यार्थियों को उनके शैक्षणिक स्तर के अनुसार अलग-अलग बैचों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. कैसे संतुलित तैयारी से सफलता प्राप्त कर सकते हैं, इसके बारे में बताया गया. विषय विशेषज्ञों ने तैयारी की रणनीति, समय प्रबंधन और परीक्षा पैटर्न को लेकर विस्तार से मार्गदर्शन दिया. इस अवसर पर अतिथि के रूप में रिम्स डिपार्टमेंट ऑफ सर्जिकल ऑंकोलॉजी एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रोहित कुमार झा, संकल्प हॉस्पिटल बारियातू और सदर हॉस्पिटल रांची के कंसलटेंट डॉ. शालिनी कुमारी सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे. उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के महत्व पर जोर दिया. डॉ. रोहित कुमार झा ने कहा कि मेडिकल की तैयारी सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि निरंतर अभ्यास और मानसिक दृढ़ता भी उतनी ही जरूरी है. सही दिशा में मेहनत और धैर्य ही विद्यार्थियों को सफलता तक पहुंचाता है. डॉ. शालिनी कुमारी ने कहा कि अनुशासन और नियमित पढ़ाई ही सफलता की कुंजी है. आत्मविश्वास बनाए रखना हर छात्र के लिए सबसे बड़ी ताकत है.
सही कोचिंग के साथ सही व्यवस्था, अनुशासन और निगरानी बेहद जरूरी है
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बायोम इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर पंकज सिंह ने कहा कि कोचिंग आपको पढ़ा सकती है, लेकिन सफलता का फैसला छात्रावास के कमरे में होता है. अक्सर अभिभावक यह मान लेते हैं कि अच्छे कोचिंग संस्थान में नामांकन के बाद सब कुछ अपने आप ठीक हो जाएगा, जबकि वास्तविकता इससे अलग है. उन्होंने कहा कि छात्र दिन के केवल 6-7 घंटे कोचिंग में बिताते हैं, जबकि बाकी समय वे छात्रावास या अपने कमरे में होते हैं, और वहीं उनकी असली तैयारी तय होती है. इन्हीं समय में यह तय होता है कि छात्र रिवीजन करेगा या नहीं, होमवर्क पूरा करेगा या मोबाइल में समय बिताएगा. धीरे-धीरे एक चैप्टर छूटता है, फिर दूसरा और फिर आत्मविश्वास भी कम होने लगता है. जब तक अभिभावकों को इसका एहसास होता है, तब तक छात्र पीछे जा चुके होते है. अभिभावक अब शिक्षक या कोचिंग बदलने की सोचते हैं लेकिन असल समस्या यह नहीं है, बेहतर तैयारी के लिए जरूरत है बेहतर वातावरण. इसलिए सही कोचिंग के साथ सही व्यवस्था, अनुशासन और निगरानी बेहद जरूरी है. ऐसा वातावरण चुने, जहां छात्र केवल पढ़े ही नहीं, बल्कि रोज उसकी प्रगति पर नजर रखी जाए.
मेडिकल स्टूडेंट्स ने अभ्यर्थियों को मोटिवेट किया
इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे छात्र भी शामिल हुए. उन्होंने मेडिकल की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को मोटिवेट किया. अमन ने कहा कि सही टाइम मैनेजमेंट और रोजाना के छोटे लक्ष्य ही बड़ी सफलता दिलाते हैं. लखन ने कहा कि अपने शिक्षकों से बात करने में बिल्कुल न हिचकिचाए, जो भी डाउट हो उसे तुरंत क्लियर कर ले. विपुल ने कहा कि हर टेस्ट से सीख लेकर अपनी तैयारी को बेहतर करें. संत ने कहा कि डिस्ट्रैक्शन से दूर रहकर लक्ष्य पर फोकस बनाए रखें. सौरभ ने कहा कि अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन को हल्के में ना लें. राघव ने कहा कि पॉजिटिव माइंडसेट और आत्मविश्वास ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है.
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