पटना : राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल ‘पिंक बस’ को शुरू हुए एक वर्ष पूरे हो गए हैं। इस दौरान 10 लाख से अधिक महिला यात्रियों ने इन बसों का सफर किया, जिससे बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) को लगभग ढाई करोड़ रुपए की आय हुई है। पहले जहां महिलाएं घर की चारदीवारी तक सीमित रहती थीं, आज वो स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों तक जाने के लिए सड़कों पर बेताबी से पिंक बस का इंतजार करती नजर आती हैं।
प्रति महीने औसतन 83 हजार से अधिक लड़कियां व महिलाएं ऑटो रिक्शा छोड़ पिंक बस के जरिए सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचती हैं
आपको बता दें कि प्रति महीने औसतन 83 हजार से अधिक लड़कियां व महिलाएं ऑटो रिक्शा छोड़ पिंक बस के जरिए सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचती हैं। यह बदलाव बिहार में महिलाओं के लिए उठाए जा रहे सकारात्मक कदमों का नतीजा है। इस किफायती सफलता का पूरा श्रेय इन्हीं महिलाओं को जाता है, जिनकी भागीदारी और विश्वास ने इस योजना को धरातल पर सार्थक बनाया।
पटना में 5 लाख से अधिक महिलाओं ने किया सफर
निगम के अनुसार, सीएनजी आधारित पिंक बसें पटना सहित छह प्रमंडलों पटना, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, पूर्णिया और दरभंगा में संचालित हो रही हैं। वर्तमान में कुल 100 पिंक बसें चल रही हैं, जिनमें पटना में 30, मुजफ्फरपुर में 20, गयाजी में 15, दरभंगा में 15, भागलपुर में 10 और पूर्णिया में 10 बसें हैं। सबसे अधिक पांच लाख 74 हजार महिला यात्री राजधानी पटना में पिंक बस से यात्रा कर चुकी हैं।
100 से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार
पिंक बस से जुड़कर 100 से अधिक महिलाओं को बस संवाहक के रूप में नौकरी मिल चुकी है। इधर, छह महिला ड्राईवर भी पिंक बस की कमान संभालने के लिए ट्रेनिंग फेज से गुजर रहीं हैं। सरकार की इस पहल ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक वर्ष की सफलता के बाद अब इस सेवा का और विस्तार करने की तैयारी है, ताकि राज्य के कोने-कोने तक महिलाओं को सुरक्षित और सस्ती यात्रा सुविधा उपलब्ध हो सके।
यह भी पढ़े : स्टीयरिंग पर बेटियां : 14 फरवरी को पिंक बसों के लिए 6 महिला चालकों का नियोजन
Highlights







