झारखंड में बस और पेट्रोल ऑटो किराया बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। बस ऑपरेटरों ने 15 से 20 फीसदी किराया वृद्धि का प्रस्ताव दिया है। जल्द परिवहन विभाग के साथ बैठक होगी।
Jharkhand Bus Fare Hike रांची: झारखंड में सार्वजनिक परिवहन से सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है। झारखंड बस ऑनर्स एसोसिएशन ने राज्य के भीतर संचालित बसों के किराए में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव परिवहन विभाग को सौंप दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि डीजल, स्पेयर पार्ट्स और परिचालन लागत में लगातार वृद्धि के कारण वर्तमान किराए पर संचालन करना मुश्किल हो रहा है।
Jharkhand Bus Fare Hike:परिवहन विभाग को सौंपा गया प्रस्ताव
बस ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने परिवहन सचिव के नाम प्रस्ताव भेजते हुए किराया बढ़ाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से किराए में संशोधन नहीं हुआ है, जबकि परिवहन क्षेत्र की लागत लगातार बढ़ रही है। प्रस्ताव मिलने के बाद विभागीय स्तर पर इसकी समीक्षा शुरू कर दी गई है।
Key Highlights
बस ऑपरेटरों ने किराया बढ़ाने का प्रस्ताव परिवहन विभाग को सौंपा।
बस किराए में 15 से 20 फीसदी तक वृद्धि की मांग।
राज्य के भीतर चलने वाली बसों पर होगा फैसला।
पेट्रोल ऑटो का न्यूनतम किराया 500 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये करने का प्रस्ताव।
परिवहन विभाग के साथ जल्द बैठक कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
Jharkhand Bus Fare Hike:जल्द होगी विभाग और ऑपरेटरों की बैठक
सूत्रों के अनुसार किराया वृद्धि के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए परिवहन विभाग और बस ऑपरेटरों के बीच जल्द बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में राज्य के भीतर चलने वाली बस सेवाओं के किराए पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। विभाग यात्रियों और ऑपरेटरों दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने की तैयारी में है।
Jharkhand Bus Fare Hike:पेट्रोल ऑटो किराया बढ़ाने की भी मांग
बस किराए के साथ-साथ पेट्रोल ऑटो चालकों ने भी किराया बढ़ाने की मांग रखी है। वर्तमान में रांची से आसपास के क्षेत्रों के लिए 500 रुपये निर्धारित किराए को बढ़ाकर 600 रुपये करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अलावा 15 से 20 रुपये प्रति किलोमीटर की दर को बढ़ाकर 30 से 40 रुपये प्रति किलोमीटर करने की मांग की गई है। ऑटो चालकों का तर्क है कि ईंधन और रखरखाव की लागत बढ़ने से मौजूदा किराए पर संचालन करना कठिन हो गया है।
यदि प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो राज्यभर में बस और ऑटो यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय परिवहन विभाग के साथ होने वाली बैठक के बाद ही लिया जाएगा।
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