पटना : बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने कॉमन सिविल कोड पर कहा कि
हम प्रेम भाईचारा के साथ आगे बढ़ते हैं.
इसलिए ऐसी कोई भी काम हम नहीं करते हैं, जिससे प्रेम भाईचारा में खटास पैदा हो. उ
न्होंने साफ कहा कि बिहार में कॉमन सिविल कोर्ट की कोई जरूरत नहीं है.
इफ्तार पार्टी को राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं
कल हज भवन में हुए इफ्तार पार्टी के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को उनके गाड़ी तक छोड़ने गए, इस पर अशोक चौधरी ने कहा कि इससे राजनीतिक रंग देने की कोई जरूरत नहीं है. जब राजद ने इफ्तार पार्टी दिया था तो हमें बुलाया गया था. तो हमने उन्हें बुलाया. हमारे नेता नीतीश कुमार हमेशा प्रेम और भाईचारा की बात करते हैं. किसी से मुलाकात करने पर कयास नहीं लगाने चाहिए. वहीं मंत्रिमंडल विस्तार पर अशोक चौधरी ने कहा कि ये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बीजेपी के बीच की बात है. इसके बारे में हमें ज्यादा जानकारी नहीं है.
क्या है कॉमन सिविल कोड
कॉमन सिविल कोड भारत में एक राजनीतिक मुद्दा रहा है। इस मुद्दे पर समय-समय पर बहस होती रही है. भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में समान सिविल संहिता का उल्लेख मिलता है, जहां राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में संविधान में राज्य को कॉमन सिविल कोड के लिए प्रयास करने हेतु निर्देशित किया है. आधुनिक भारत में कॉमन सिविल कोड की आवश्यकता प्रतीत होती है, हालांकि इस पर स्पष्ट और खुलकर बातचीत कभी भी नहीं हो पाई क्योंकि जनता में इस मुद्दे को विवाद का मुद्दा बना दिया गया है. यदि ध्यानपूर्वक देखें तो कॉमन सिविल कोड के लाभ भी हैं. कॉमन सिविल कोड का अर्थ होता है सभी व्यक्तिगत विधियां एक समान कर दी जाएं. अभी भारत में व्यक्तिगत विधियां अलग-अलग हैं.
व्यक्तिगत विधियां किसे कहा जाता है?
व्यक्तिगत विधियां उन कानूनों को कहा जाता है जो नागरिकों के निजी मामले को नियमित करते हैं. जैसे कि विवाह, तलाक, भरण पोषण, बच्चा गोद लेना और उत्तराधिकार. यह सभी मामले नागरिकों के व्यक्तिगत मामले है, जिस समय भारत का संविधान बनाया गया तब इन मामलों में भारत के सभी लोगों को उनके धर्म या जाति के रीति-रिवाजों के अनुसार कानून मानने की छूट दी गई. वर्तमान में सभी संप्रदायों के लिए अपने अपने व्यक्तिगत कानून हैं.
रिपोर्ट: प्रणव राज
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