सीबीआई ने चक्रधरपुर रेल मंडल के डिप्टी चीफ सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर को 4 लाख रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में छापेमारी।
CBI Trap रांची: सीबीआई की कोलकाता एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने दक्षिण-पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में तैनात डिप्टी चीफ सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर सत्यम कुमार को चार लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में कोलकाता स्थित मेसर्स एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड के दो प्रतिनिधियों सुब्रत चक्रवर्ती और राजू पंडित को भी गिरफ्तार किया गया है। मामले में सीबीआई ने झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार में आरोपियों के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं।
CBI Trap: हावड़ा रेलवे स्टेशन पर रिश्वत लेते हुए हुई गिरफ्तारी
सीबीआई के अनुसार, कोलकाता एसीबी शाखा की टीम ने हावड़ा रेलवे स्टेशन पर जाल बिछाकर डिप्टी चीफ इंजीनियर सत्यम कुमार को चार लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। इसके साथ ही रिश्वत देने पहुंचे एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड के दो प्रतिनिधियों सुब्रत चक्रवर्ती और राजू पंडित को भी हिरासत में लिया गया। एजेंसी ने 24 जुलाई को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद कार्रवाई शुरू की थी।
CBI Trap: संविदा फाइलों में लाभ पहुंचाने के बदले ली जा रही थी रिश्वत
जांच में सामने आया है कि रेलवे अधिकारी और निजी कंपनी के प्रतिनिधियों ने मिलकर कथित साजिश रची थी। आरोप है कि चक्रधरपुर रेल मंडल में कंपनी द्वारा किए जा रहे सिग्नल एवं दूरसंचार कार्यों से संबंधित प्राइस वेरिएशन क्लॉज और अन्य संविदा मामलों की फाइलों को मंजूरी देने तथा प्रक्रिया में लाभ पहुंचाने के बदले अवैध धन की मांग की जा रही थी। इसी सिलसिले में चार लाख रुपये की रिश्वत ली जा रही थी, जिसके दौरान सीबीआई ने कार्रवाई की।
Key Highlights:
सीबीआई ने रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर को 4 लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा।
एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड के दो प्रतिनिधि भी गिरफ्तार।
झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में एक साथ छापेमारी।
संविदा फाइलों को मंजूरी देने के बदले रिश्वत लेने का आरोप।
मई 2026 में भी 5 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप।
CBI Trap: मई 2026 में भी 5 लाख रुपये लेने का आरोप
सीबीआई की प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी अधिकारी ने मई 2026 में भी इसी कंपनी से इसी प्रकार के कार्यों में लाभ पहुंचाने के बदले करीब पांच लाख रुपये की रिश्वत ली थी। एजेंसी अब जब्त दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क और लेनदेन की जानकारी जुटाई जा सके। मामले में आगे की जांच जारी है।
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