Advertisment

12 रुपये से शुरू हुआ सफर, दुनिया में गूंज रही बिहार की Folk Art की कहानी

बिहार संग्रहालय स्थापना दिवस पर पद्मश्री कलाकारों ने लोककला के संघर्ष और पुनर्जागरण की कहानी सुनाई। 101 समकालीन कलाकारों की प्रदर्शनी बनी आकर्षण।


Folk Art  पटना: कभी घरों की दीवारों तक सीमित बिहार की लोककलाओं ने आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कला जगत में अपनी पहचान बना ली है। इस सफर की शुरुआत कई कलाकारों के लिए संघर्ष से हुई। मिथिला चित्रकला जब पहली बार दीवारों से निकलकर कागज पर आई तो एक पेंटिंग के बदले महज 12 रुपये मिले थे। बिहार संग्रहालय के स्थापना दिवस पर पद्मश्री कलाकार बौआ देवी ने इस ऐतिहासिक दौर की यादें साझा कीं।

स्थापना दिवस के दूसरे दिन बिहार संग्रहालय में लोककला, पारंपरिक कला, संग्रहालय और समकालीन कला पर चर्चा हुई। कलाकारों और कला विशेषज्ञों ने बिहार की समृद्ध कला परंपरा के साथ उसके सामाजिक संघर्ष और बदलते स्वरूप पर भी विचार रखे।

Folk Art :12 रुपये से शुरू हुई मिथिला पेंटिंग की नई यात्रा

बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह के मॉडरेशन में आयोजित संवाद में पद्मश्री बौआ देवी ने मिथिला चित्रकला के उस दौर को याद किया, जब वर्ष 1964-65 में यह कला दीवारों से उतरकर कागज पर आ रही थी।

उन्होंने बताया कि भास्कर कुलकर्णी के प्रयास से मधुबनी की पांच महिला कलाकारों ने पहली बार कागज पर चित्र बनाए। इनमें उनके द्वारा बनाई गई पेंटिंग के लिए उन्हें 12 रुपये मिले थे।

उस समय यह रकम भले ही छोटी थी, लेकिन मिथिला चित्रकला के इतिहास में इसका महत्व बहुत बड़ा था। कागज पर बनी इन पेंटिंग्स ने धीरे-धीरे मिथिला कला को घरों की दीवारों से निकालकर देश और दुनिया के कला मंच तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया।


Key Highlights

  • मिथिला चित्रकला की कागज पर पहली यात्रा में एक पेंटिंग के लिए मिले थे 12 रुपये।

  • पद्मश्री कलाकारों ने लोककलाओं के संघर्ष और पुनर्जागरण की कहानी साझा की।

  • सुजनी कला से मुजफ्फरपुर क्षेत्र की 5,000 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं।

  • बिहार में लोककला के क्षेत्र में 16 पद्मश्री कलाकारों का उल्लेख किया गया।

  • 101 समकालीन कलाकारों की प्रदर्शनी और बिहार संग्रहालय बिनाले 2027 चर्चा के केंद्र में रहा।


Folk Art :सामाजिक बंदिशों से निकली गोदना और सुजनी कला

पद्मश्री शांति देवी और शिवन पासवान ने गोदना पेंटिंग के विकास की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में मिथिला पेंटिंग कुछ विशेष जातीय समुदायों तक सीमित थी और दलित कलाकारों को देवी-देवताओं की चित्रकारी की अनुमति नहीं थी।

ऐसी परिस्थितियों में कलाकारों ने शरीर पर गोदे जाने वाले पारंपरिक गोदना चित्रों को कागज पर उतारना शुरू किया। यही प्रयोग आगे चलकर गोदना पेंटिंग की अलग पहचान बना।

पद्मश्री निर्मला देवी ने सुजनी कला के सफर की जानकारी दी। मुजफ्फरपुर के भुसरा गांव में कभी पुराने कपड़ों से नवजात बच्चों के लिए गेंदरा यानी सुजनी बनाई जाती थी। बाद में बीजी श्रीनिवासन की प्रेरणा से महिलाओं ने नए कपड़ों पर सुजनी का काम शुरू किया।

आज इस कला से क्षेत्र की 5,000 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। सुजनी ने पारंपरिक कला को पहचान देने के साथ महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम भी तैयार किया।

Folk Art :16 पद्मश्री कलाकारों से लेकर 101 समकालीन कलाकारों तक

बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार की कला परंपरा का इतिहास प्राचीन काल से समृद्ध रहा है। मौर्य काल में पटना कला और शिल्प का प्रमुख केंद्र था। गुप्त और पाल काल में भी मगध कला और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा।

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी बिहार की लोककलाओं के संरक्षण और विकास के प्रयास जारी रहे। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कलाकारों ने अपनी परंपराओं को जीवित रखा। इसी का परिणाम है कि बिहार में लोककला के क्षेत्र में 16 पद्मश्री कलाकार हैं।

कार्यक्रम में कर्नाटक के शशिधर राव ने वहां की लोककलाओं और संग्रहालयों पर प्रस्तुति दी। चेन्नई के दक्षिण चित्र म्यूजियम से जुड़े शरथ नंबियार ने दक्षिण भारत की पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और संग्रहालयों में उनके प्रदर्शन पर प्रकाश डाला।

विशेषज्ञों ने कहा कि लोककलाएं केवल संग्रहालय में रखी जाने वाली वस्तुएं नहीं हैं। इनका सीधा संबंध लोगों के दैनिक जीवन, परंपराओं, सामाजिक व्यवहार और सांस्कृतिक पहचान से है।

बिहार संग्रहालय स्थापना दिवस के अवसर पर लोककला आधारित बिहार संग्रहालय बिनाले 2027 को लेकर भी संगोष्ठी हुई। इसमें लोककलाओं के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और उन्हें आधुनिक संग्रहालयों में नए तरीके से प्रस्तुत करने पर चर्चा हुई।

इस मौके पर सुप्रसिद्ध मूर्तिकार राजेश राम की प्रदर्शनी ‘कागज की कश्ती’ पर भी चर्चा हुई। नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के महानिदेशक संजीव किशोर गौतम ने बिहार संग्रहालय और नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 101 नामचीन समकालीन कलाकारों की प्रदर्शनी को महत्वपूर्ण पहल बताया।

Highlights

Bihar Modern Flower Mandi: फूल कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार? CM...

Bihar Modern Flower Mandi: बिहार में फूलों की खेती और व्यापार से जुड़े किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए एक आधुनिक बाज़ार की मांग...

Hazaribagh Prince Khan Gang: हजारीबाग में प्रिंस खान गिरोह के 4...

Hazaribagh Prince Khan Gang: संगठित अपराध के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में, ज़िला पुलिस ने प्रिंस खान गैंग से जुड़े चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार...

Har Ghar Tiranga: हर घर तिरंगा’ अभियान से रंगेगा बिहार, मंत्री...

 बिहार में 9 से 17 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा’ अभियान चलेगा। मंत्री नीतीश मिश्रा ने नगर निकायों को तिरंगा रैली और जनभागीदारी बढ़ाने...