Jharkhand Onion Price Hike: झारखंड में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। पिछले करीब एक महीने में प्याज के दाम दोगुने से ज्यादा हो गए हैं। 24 जुलाई को रांची के बाजारों में 25 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाला प्याज अब 60 से 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। प्याज की कीमतों में अचानक आई इस तेजी का असर खुदरा ग्राहकों के साथ-साथ सब्जी विक्रेताओं पर भी पड़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में प्याज के भाव में और बढ़ोतरी हो सकती है।
रांची में 60-65 रुपये किलो तक पहुंचा प्याज
रांची समेत झारखंड के विभिन्न सब्जी बाजारों में प्याज के दाम में तेज उछाल देखा जा रहा है। पंडरा स्थित कृषि बाजार समिति के थोक मंडी में भी कीमतों में बढ़ोतरी का असर दिखाई दे रहा है। झारखंड आलू-प्याज विक्रेता संघ के अध्यक्ष मदन प्रसाद के अनुसार, प्याज की कीमत बढ़ने के पीछे एक से अधिक कारण हैं। उनके मुताबिक इस समय बाजार में मांग की तुलना में प्याज की उपलब्धता कम है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले दिनों में प्याज की कीमत में प्रति किलोग्राम 10 से 20 रुपये तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है।
कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से नहीं पहुंची पर्याप्त सप्लाई
मदन प्रसाद के अनुसार, आमतौर पर अगस्त के दौरान कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से झारखंड में नए प्याज की सप्लाई पहुंचती है। लेकिन इस बार पानी की कमी के कारण दोनों राज्यों में प्याज की फसल को नुकसान हुआ है। उन्होंने दावा किया कि फसल प्रभावित होने के कारण अभी तक इन राज्यों से झारखंड में प्याज की नियमित सप्लाई नहीं पहुंची है। इसका असर राज्य के बाजार पर दिखाई दे रहा है। झारखंड प्याज की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से आने वाली सप्लाई पर भी निर्भर करता है। कारोबारियों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में प्याज की कम कीमतों के कारण किसानों को नुकसान हुआ, जिसके चलते इस वर्ष इन राज्यों में प्याज की खेती के रकबे में कमी आई।
बारिश ने झारखंड की स्थानीय फसल को भी पहुंचाया नुकसान
झारखंड के पलामू, हजारीबाग और आसपास के इलाकों में भी प्याज की फसल को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। कारोबारियों के अनुसार, जब स्थानीय फसल तैयार होने वाली थी, उसी दौरान हुई बेमौसम बारिश से फसल प्रभावित हुई। ऐसे में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से आने वाली सप्लाई पर निर्भरता बढ़ गई। वहीं, बाहर से आने वाले प्याज के दाम बढ़ने से झारखंड के बाजार में भी कीमतों में तेजी आई। मदन प्रसाद ने बताया कि नासिक बाजार में भी प्याज की कीमत करीब 45 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। ऐसे में झारखंड में आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों पर दबाव बने रहने की आशंका है।
झारखंड में रोज 50-60 ट्रक प्याज की खपत
झारखंड में प्याज की खपत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां रोजाना करीब 50 से 60 ट्रक प्याज की खपत होने का दावा किया गया है। प्रत्येक वाहन में लगभग 30 टन प्याज लदा होता है। फिलहाल सावन का महीना होने के कारण प्याज की खपत अपेक्षाकृत कम बताई जा रही है। कारोबारियों का कहना है कि सावन समाप्त होने के बाद मांग बढ़ने पर कीमतों में और तेजी आ सकती है। बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए NAFED और NCCF जैसी एजेंसियों के माध्यम से प्याज की खरीद के प्रयास किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इन प्रयासों का बाजार कीमतों पर कितना असर पड़ा है, इसे लेकर स्थानीय कारोबारियों ने स्पष्ट जानकारी नहीं होने की बात कही।
विक्रेता बोले- महंगी खरीद का असर ग्राहकों पर
पंडरा थोक बाजार में प्याज की बढ़ी कीमतों से सब्जी विक्रेताओं की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। ब्राम्बे निवासी सब्जी विक्रेता फिरोज अंसारी के अनुसार, थोक बाजार में ही प्याज करीब 48 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मिल रहा है। इसके अलावा कुछ बोरियों में खराब या सूखा प्याज निकलने से भी नुकसान होता है। वहीं, बजरा निवासी बुजुर्ग खरीदार बनेश्वरी देवी ने प्याज की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई। उनका कहना है कि पहले जहां प्याज 25 से 30 रुपये किलो मिल जाता था, वहीं अब इसके लिए 50 से 60 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है। विक्रेता परमानंद चौधरी का कहना है कि अगर थोक बाजार में ही प्याज महंगा मिल रहा है तो खुदरा कीमत भी बढ़ेगी। उनके मुताबिक, कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
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