Bihar Mahila Rojgar Yojana: मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से बदली जिंदगी, जीविका से जुड़कर महिलाओं ने खड़ी की अपनी कमाई

Bihar Mahila Rojgar Yojana: बिहार में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जीविका स्वयं सहायता समूहों और मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के माध्यम से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन योजनाओं से जुड़कर महिलाएं सिलाई, मुर्गीपालन, किराना, पशुपालन, कृषि और अन्य छोटे कारोबार शुरू कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। औरंगाबाद जिले के देव प्रखंड की धर्मशिला देवी भी ऐसी ही महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने आर्थिक सहायता और जीविका समूह के सहयोग से अपना कारोबार शुरू किया और आज आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

50 हजार के ऋण से शुरू किया सिलाई मशीन का कारोबार

धर्मशिला देवी वर्ष 2023 में चमेली जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने 50 हजार रुपये का ऋण लेकर देव बाजार में सिलाई मशीन बिक्री का व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत में कारोबार को व्यवस्थित करने में उन्हें कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके बाद मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत उन्हें 10 हजार रुपये की सहायता राशि मिली। इस राशि से उन्होंने अतिरिक्त मशीनें और जरूरी उपकरण खरीदे। इससे उनका कारोबार और व्यवस्थित हुआ और वह अपने व्यवसाय के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने लगीं।

जीविका से जुड़कर महिलाएं बना रहीं अपनी पहचान

धर्मशिला देवी की तरह बिहार की बड़ी संख्या में महिलाएं जीविका स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अलग-अलग तरह के रोजगार और उद्यम चला रही हैं। वर्ष 2006 में शुरू हुई जीविका परियोजना के माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। महिलाएं समूहों के माध्यम से ऋण लेकर कारोबार शुरू कर रही हैं और अपनी आय बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। बिहार में महिला सशक्तिकरण के लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को भी इसी प्रयास से जोड़ा गया है। योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं का जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ा होना आवश्यक है।

10 हजार रुपये से लेकर 2 लाख तक अतिरिक्त सहायता

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत हर परिवार की एक महिला को रोजगार शुरू करने के लिए उसके बैंक खाते में 10 हजार रुपये की पहली किस्त देने की व्यवस्था बताई गई है। इसके बाद छह महीने में रोजगार की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा। प्रगति के आधार पर महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता मिलने की बात कही गई है। इसके अलावा महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए हाट-बाजार के माध्यम से अवसर उपलब्ध कराने का भी प्रावधान बताया गया है। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

1.81 करोड़ से अधिक महिलाओं तक पहुंच रही योजना

मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी के अनुसार, मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत जीविका से जुड़ी 1.81 करोड़ से अधिक महिलाओं को लाभ दिया जा रहा है। पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से राशि भेजी जा रही है। सरकार के अनुसार, योजना से आगे जुड़ने वाली पात्र महिलाओं को भी सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और उद्यमिता के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

मुर्गीपालन से किराना और सिलाई तक, महिलाओं की सफलता की कहानी

अरवल की केशोमनी देवी वर्ष 2016 से जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। वर्ष 2019 में उन्होंने समूह से 20 हजार रुपये का ऋण लेकर और अपनी बचत मिलाकर मुर्गीपालन शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने कारोबार बढ़ाया और अब हर महीने करीब 1,000 से 1,500 मुर्गियां तैयार कर बेचने की बात बताती हैं। इससे उन्हें 20 से 25 हजार रुपये की मासिक आमदनी होती है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से मिली 10 हजार रुपये की राशि को भी उन्होंने मुर्गीपालन में लगाया है। लखीसराय की रिंकू देवी ने जीविका से जुड़ने के बाद सतत जीविकोपार्जन योजना का लाभ लेकर किराना दुकान शुरू की। इसके बाद उन्होंने शृंगार और कपड़े का व्यवसाय, पशुपालन और पट्टे पर खेती भी शुरू की। उनके अनुसार, अब इन सभी व्यवसायों से हर महीने करीब 25 से 30 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।

Bihar Mahila Rojgar Yojana

अरवल की बेबी कुमारी भी जीविका समूह से ऋण लेकर अपने रोजगार को आगे बढ़ा रही हैं। वह शृंगार सामग्री, सिलाई और मनी ट्रांसफर का काम करती हैं। इसके अलावा कृषि उद्यमी सेवा केंद्र के माध्यम से खाद और बीज बेचने का काम भी कर रही हैं। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से मिली 10 हजार रुपये की राशि को उन्होंने अपने रोजगार में लगाया है। उनके अनुसार, विभिन्न रोजगार से होने वाली आमदनी से उन्होंने अपने परिवार के लिए पक्का मकान भी बनवाया है। महिलाओं की ये कहानियां बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह, ऋण और सरकारी सहायता के माध्यम से छोटे स्तर से शुरू किए गए रोजगार को आगे बढ़ाया जा सकता है। महिला उद्यमिता और आर्थिक आत्मनिर्भरता के जरिए बिहार में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

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