Bihar Brick Kiln OTS, पटना: बिहार में वर्षों से बकाया राशि और उस पर बढ़ते ब्याज के कारण आर्थिक दबाव झेल रहे ईंट भट्ठा संचालकों के लिए राज्य सरकार ने राहत की घोषणा की है। खान एवं भूतत्व विभाग ने वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना के तहत पुराने बकाये के निपटारे का रास्ता साफ किया है। इसके तहत करीब 6 हजार ईंट भट्ठा संचालकों को निर्धारित अवधि में अपनी मूल बकाया राशि एकमुश्त जमा करनी होगी। इसके बाद बकाया पर लगने वाले ब्याज को माफ किया जाएगा। सरकार के अनुसार, इस प्रक्रिया से विभाग को करीब 289 करोड़ 38 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने शुक्रवार को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी दी।
21 सितंबर से 20 दिसंबर तक OTS का मिलेगा लाभ
मंत्री के अनुसार, ईंट भट्ठा कारोबारियों को OTS योजना का लाभ लेने के लिए 21 सितंबर से 20 दिसंबर तक का समय दिया गया है। इस अवधि में संबंधित संचालकों को अपनी मूल बकाया राशि एकमुश्त सरकारी कोष में जमा करनी होगी। सरकार की ओर से यह व्यवस्था लंबे समय से लंबित बकाया राशि के समाधान के उद्देश्य से लागू की गई है। इसके तहत कारोबारियों को मूल रकम जमा करने के बाद वर्षों से जुड़े ब्याज के अतिरिक्त बोझ से राहत मिलेगी। हालांकि, निर्धारित समय-सीमा के भीतर भुगतान नहीं करने वाले ईंट भट्ठा संचालकों के लिए पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी। ऐसे संचालकों को बकाया राशि ब्याज सहित जमा करनी होगी।
कारोबारियों के साथ बैठक के बाद लिया गया फैसला
डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि बकाया राशि के समाधान को लेकर ईंट भट्ठा कारोबारियों के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बैठकें हुई थीं। कारोबारियों की ओर से लंबे समय से पुराने बकाये के निपटारे के लिए एकमुश्त भुगतान की व्यवस्था की मांग की जा रही थी। मामले को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाए जाने के बाद हाल में हुई कैबिनेट बैठक में OTS प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके बाद निर्धारित समय-सीमा के साथ योजना को लागू करने का रास्ता साफ हुआ। सरकार का उद्देश्य एक ओर लंबे समय से लंबित राजस्व की वसूली करना है, वहीं दूसरी ओर कारोबारियों को पुराने बकाये पर बढ़ते ब्याज के आर्थिक दबाव से राहत देना है।
जिग-जैग तकनीक से ईंट भट्ठों में प्रदूषण नियंत्रण
प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने बिहार में ईंट भट्ठा उद्योग को पर्यावरण के लिहाज से बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईंट निर्माता संघ से जुड़े कारोबारियों ने जिग-जैग तकनीक अपनाई है। इस तकनीक से ईंट भट्ठों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलने की बात कही गई। मंत्री ने अवैध रूप से संचालित ईंट भट्ठों को लेकर स्पष्ट किया कि नियमों के विरुद्ध संचालन पाए जाने पर संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
DMF की 70 फीसदी राशि खनन प्रभावित प्रखंडों में होगी खर्च
मंत्री ने जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) की राशि के इस्तेमाल में किए गए बदलाव की भी जानकारी दी। अब DMF की 70 फीसदी राशि उस प्रखंड में खर्च की जाएगी, जहां से खनिज का खनन हो रहा है। शेष 30 फीसदी राशि जिले के अन्य प्रखंडों में खर्च की जाएगी। इससे पहले DMF राशि के इस्तेमाल का अनुपात 60:40 था। नए प्रावधान के तहत खनन प्रभावित क्षेत्रों को अधिक राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा संबंधित जिलों के सांसदों, विधान परिषद सदस्यों और विधायकों को भी जिला खनिज फाउंडेशन की सदस्यता दी गई है। सरकार के अनुसार, जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
नवादा-शेखपुरा में पत्थर खनन ब्लॉकों की नीलामी
खनन क्षेत्र से जुड़ी अन्य जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि विभिन्न जिलों में पत्थर खनन ब्लॉकों की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। नवादा और शेखपुरा में पत्थर खनन ब्लॉकों की नीलामी पूरी हो चुकी है। अन्य जिलों में भी नीलामी की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है। खनिज क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिए 22 सितंबर को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के साथ बैठक प्रस्तावित है। इस तरह सरकार की OTS व्यवस्था से ईंट भट्ठा संचालकों के पुराने बकाये के समाधान के साथ राजस्व वसूली का रास्ता भी आसान करने का प्रयास किया गया है। योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित अवधि में मूल बकाया जमा करना जरूरी होगा।
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