Jharkhand High Court: हिंदी साहित्य सम्मेलन की डिग्री पर हटाये गये पारा शिक्षकों को बड़ी राहत, सेवा बहाल करने का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद के प्रमाण पत्रों पर हटाये गये पारा शिक्षकों की सेवा बहाल करने और बकाया मानदेय भुगतान का आदेश दिया है।


Jharkhand High Court रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद से प्राप्त शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के आधार पर सेवा से हटाये गये पारा शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य के विभिन्न जिलों से संबंधित कई रिट याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए पारा शिक्षकों की सेवा जारी रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने अगस्त 2024 से उनके द्वारा की गयी सेवा अवधि का मानदेय या वेतन भुगतान करने का भी आदेश दिया है।

अदालत ने पारा शिक्षकों की सेवा रोकने से संबंधित आदेशों को रद्द करते हुए पूरी प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है।

Jharkhand High Court:2003 से 2006 के बीच हुई थी पारा शिक्षकों की नियुक्ति

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि संबंधित याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति वर्ष 2003 से 2006 के बीच पारा शिक्षक के रूप में हुई थी। नियुक्ति के समय निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक थी और सभी याचिकाकर्ताओं के पास नियुक्ति के समय यह योग्यता मौजूद थी।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और झारखंड एजुकेशन प्रोजेक्ट काउंसिल की ओर से भी इस तथ्य का विरोध नहीं किया गया। ऐसे में केवल हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद से प्राप्त प्रमाण पत्रों के आधार पर उनकी सेवा समाप्त करना अदालत के समक्ष विचार का प्रमुख विषय रहा।

Jharkhand High Court:हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रमाण पत्र पर पहले भी आ चुका है फैसला

अदालत ने कहा कि हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद के प्रमाण पत्रों को लेकर हाईकोर्ट पहले भी फैसला दे चुका है। पांच जुलाई 2012 को डिवीजन बेंच ने हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद से प्राप्त इंटरमीडिएट प्रमाण पत्र को वैध माना था।

इस फैसले का अनुपालन संबंधित विभाग की ओर से चार सितंबर 2012 को जारी आदेश के माध्यम से किया गया था। अदालत ने पूर्व के इस न्यायिक निर्णय और उसके अनुपालन को भी अपने आदेश में ध्यान में रखा।

 

Jharkhand High Court:बिना प्रक्रिया सेवा रोकना नियमों के अनुरूप नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि झारखंड सहायक अध्यापक सेवाशर्त नियमावली, 2021 लागू होने के बाद पारा शिक्षकों की सेवा शर्तें इसी नियमावली से नियंत्रित होंगी। नियमावली में सेवा समाप्ति को बड़ी सजा माना गया है और इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित प्रक्रिया अपनाये बिना पारा शिक्षकों का काम रोकना और मानदेय बंद करना नियमों के अनुरूप नहीं है। इसलिए संबंधित शिक्षकों की सेवा जारी रखने और अगस्त 2024 से काम की अवधि का मानदेय या वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

Jharkhand High Court:आठ सप्ताह में पूरी करनी होगी प्रक्रिया

हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग को अदालत के आदेश के अनुरूप आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है। इससे हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद के प्रमाण पत्रों के आधार पर सेवा से हटाये गये संबंधित पारा शिक्षकों को राहत मिली है।

Key Highlights

  • झारखंड हाईकोर्ट ने पारा शिक्षकों को बड़ी राहत दी।
  • हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद के प्रमाण पत्र के आधार पर सेवा से हटाने के आदेश रद्द किये गये।
  • शिक्षकों की सेवा जारी रखने का निर्देश दिया गया।
  • अगस्त 2024 से काम की अवधि का मानदेय या वेतन भुगतान करने का आदेश।
  • संबंधित प्रक्रिया आठ सप्ताह में पूरी करने का निर्देश।

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