Bihar SEBI Financial Literacy Campaign, पटना: बिहार में लोगों को सुरक्षित निवेश के प्रति जागरूक करने और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए राज्य सरकार और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) मिलकर अभियान चलाएंगे। इस संबंध में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में राज्य में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने, निवेशकों को सही जानकारी देने और फर्जी निवेश योजनाओं के प्रति लोगों को सतर्क करने की रणनीति पर चर्चा की गई। इसके लिए संबंधित विभागों को जल्द विस्तृत रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया गया।
बिहार में निवेश की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बैठक में कहा कि बिहार की प्रति व्यक्ति आय में लगातार सुधार हो रहा है और राज्य की विकास दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इसके बावजूद म्यूचुअल फंड और प्रतिभूति बाजार में राज्य की भागीदारी अभी राष्ट्रीय औसत से पीछे है। इस अंतर को कम करने के लिए लोगों को निवेश के विभिन्न विकल्पों, जोखिमों और सुरक्षित निवेश प्रक्रियाओं की जानकारी देने पर जोर दिया गया। अभियान का उद्देश्य नागरिकों को सोच-समझकर वित्तीय निर्णय लेने में सक्षम बनाना है।
पहले जीविका दीदियों तक पहुंचेगा जागरूकता अभियान
मुख्य सचिव ने सुझाव दिया कि अभियान की शुरुआत जीविका के स्वयं सहायता समूहों से की जाए। इसके बाद दूसरे चरण में बिहार के प्रोबेशनर अधिकारियों को भी प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि वित्तीय जागरूकता का संदेश ग्रामीण समुदायों से लेकर प्रशासनिक स्तर तक पहुंच सके। बैठक में SEBI की परियोजना ‘जागरूक’ के तहत चलाए जा रहे अभियान ‘समझ से इन्वेस्टिंग सिंपल’ को बिहार में लागू करने का प्रस्ताव रखा गया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, SEBI और उसके सहयोगी संस्थान SMPs तथा NISM हिंदी में अध्ययन सामग्री और प्रशिक्षण ढांचा उपलब्ध कराएंगे। इस पहल से राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ने की बात कही गई है।

गांवों से शहरों तक चलेगा निवेशक जागरूकता अभियान
अभियान के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग रणनीतियां तैयार की जाएंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, जीविका दीदियों और ग्रामीण हाटों के माध्यम से किसानों, युवाओं और महिलाओं को जागरूक किया जाएगा। उन्हें पैसा दोगुना करने के झूठे वादों को पहचानने, सुरक्षित केवाईसी (KYC) प्रक्रिया अपनाने और वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत करने की जानकारी दी जाएगी। वहीं, पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे प्रमुख शहरों में कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कार्यस्थलों पर कार्यशालाएं आयोजित करने की योजना है। MUST कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित गतिविधियों में युवाओं और पेशेवरों को फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स तथा सोशल मीडिया पर तथाकथित ‘फिनफ्लूएंसर्स’ की भ्रामक निवेश सलाह से बचने के तरीके बताए जाएंगे।

साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव पर विशेष ध्यान
बैठक में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई गई। प्रेस विज्ञप्ति में NCRB के 2024 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि बिहार में अधिकांश साइबर अपराधों का उद्देश्य धोखाधड़ी करना होता है। प्रस्तावित अभियान के जरिए लोगों को ऑनलाइन निवेश के जोखिम, फर्जी ऐप्स और संदिग्ध वित्तीय प्रस्तावों की पहचान करने के तरीके सिखाए जाएंगे। साथ ही, धोखाधड़ी की स्थिति में SEBI के शिकायत निवारण पोर्टल और अन्य आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करने की जानकारी भी दी जाएगी। इस पहल से बिहार में निवेश संबंधी जागरूकता बढ़ाने, लोगों को वित्तीय ठगी से बचाने और सुरक्षित निवेश की आदतों को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है।
Bihar SEBI Financial Literacy अभियान क्या है?
यह बिहार सरकार और SEBI द्वारा चलाया जाने वाला एक संयुक्त अभियान है जो लोगों को सुरक्षित निवेश के प्रति जागरूक करता है और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से बचाता है। इसका उद्देश्य नागरिकों को सोच-समझकर वित्तीय निर्णय लेने में सक्षम बनाना है।
अभियान किन समूहों को लक्ष्य करेगा?
अभियान की शुरुआत जीविका के स्वयं सहायता समूहों से होगी, फिर ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों, युवाओं और महिलाओं को जागरूक किया जाएगा। पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे शहरों में कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कार्यस्थलों पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
Bihar SEBI Financial Literacy अभियान के तहत क्या सिखाया जाएगा?
लोगों को ऑनलाइन निवेश के जोखिम, फर्जी ऐप्स, धोखाधड़ी वाली योजनाओं की पहचान करना, सुरक्षित KYC प्रक्रिया अपनाना और शिकायत निवारण पोर्टल का उपयोग करना सिखाया जाएगा।
बिहार में म्यूचुअल फंड में भागीदारी क्यों पीछे है?
मुख्य सचिव ने कहा कि बिहार की विकास दर राष्ट्रीय औसत से अधिक होने के बावजूद म्यूचुअल फंड और प्रतिभूति बाजार में लोगों की भागीदारी राष्ट्रीय औसत से पीछे है, जिसका कारण वित्तीय जागरूकता की कमी है।
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