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अब पहनिये गोबर का जेवर, चूड़ी-कंगन और हेयर क्लिप, देखिये और क्या-क्या


Bokaro-अब तक आपने गोबर का इस्तेमाल घर-आंगन को लीपने और उसे गोबर प्लांट में डाल कर गैस बनाने में किया होगा, फिर उसी गैस से आपने घर का जायकेदार भोजन भी बनाया होगा. इसे खेत में डाल कर भूमि की उर्वरता तो सदियों से बढ़ाई जा रही है.
वैसे बदलते दौर में गोबर से घर-आंगन लीपने की प्रथा भी लगभग समाप्त हो रही है. लेकिन आज हम आप को एक ऐसी महिला से मिलवाते हैं, जो गोबर से न सिर्फ घर-आंगन को लीप रही है, बल्कि इसी गोबर से करीबन 2000 प्रकार के आइटम का निर्माण कर चुकी है. इसमें महिलाओं की पसंदीदा ज्वेलरी भी है.
आधुनिकता के इस दौर में गोबर के साथ इस नुतन प्रयोग करने वाली महिला हैं प्रेमलता.

गोबर निर्मित ऑर्गेनिक और हाइजीनिक आइटम का निर्माण कर रोजगार सृजन

मूल रुप से बिहार के समस्तीपुर की रहने वाली प्रेमलता ने गोबर की उपयोगिता को जन-जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है. लगभग 30 वर्षों से वह अलग-अलग राज्यों और छोटे-छोटे गांव-कस्बों में जाकर महिलाओं और बेरोजगार को गोबर से विभिन्न उत्पाद बनाना सीखा रही है, उसकी उपयोगिता बता रही है. गोबर से आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही है.

Gobar 22Scope News


प्रेमलता गोबर निर्मित इस ऑर्गेनिक और हाइजीनिक आइटम का निर्माण कर बेरोजगार युवकों को रोजगार मुहैया करवा रही है. वह अब तक गोबर से 2000 से अधिक आइटम का निर्माण कर चुकी है.
इसमें ज्वेलरी से लेकर घर में इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुएं, पूजा- हवन की चीजें, धूप-अगरबत्ती, घर में साज-सज्जा की वस्तुओं, मूर्तियां, गोबर की ईटें, चप्पल, घड़ियां, खिलौने कान की बाली, गले का हार, हाथ के चूड़ी-कंगन, हेयर क्लिप से लेकर कई सारे आइटम शामिल है.

कभी हेमलता के उत्पादों को हेय दृष्टि से देखा जाता था


कभी प्रेमलता के उत्पादों को हेय दृष्टि से देखा जाता था, लोग उसे सीरियसली नहीं लेते थें, अखबार, पत्र और पत्रिकाएं भी प्रेमलता को स्थान नहीं देते थें, लेकिन तीस वर्षों की अटूट मेहनत ने रंग दिखलाया. अब हालत यह है कि हर पत्र पत्रिका प्रेमलता के उत्पादों को अपने रंगीन पृष्ठ पर स्थान देना चाहता है, लेकिन अब प्रेमलता के पास ही इतनी फुर्सत नहीं है, कि इन पत्र-पत्रिकाओं के लिए समय निकाले, प्रेम लता का अब कोई स्थायी ठिकाना नहीं है, उसकी जिंदगी आज यहां है, तो कल वहां, शिक्षण-प्रशिक्षण में ही उसका समय निकल जाता है, हर ओर उसकी डिमांड है. वह कई राज्यों में जाकर घूम-घूम कर महिलाओं और बेरोजगारों को फ्री ऑफ कॉस्ट ट्रेनिंग देने का काम करती है. फिर उनके उत्पादों को बाजार भी महैया करवाती है.

विदेशी ग्राहकों में गोबर निर्मित जेवर और उत्पादों का क्रेज


प्रेमलता बताती है कि जो महिलाएं अपने प्रोडक्ट की बिक्री खुद नहीं कर पाती, उसकी खरीद मैं खुद करती हूं, फिर उसे एग्जीबिशन सजाकर सेल कर देती हूं. इससे महिलाओं को अच्छा खासा मुनाफा हो जाता है. खास कर विदेशियों सैलानियों को गोबर बने उत्पाद काफी पंसद आता है. वह इसकी खरीद कर बड़ी मात्रा में विदेश ले जाते हैं.

बेरोजागार युवकों को मिल रहा है रोजगार


प्रेमलता कहती है कि गोबर से बने उत्पादों का प्रचार प्रसार होने से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिलेगा, साथ ही आज की युवा पीढ़ी भी गाय की उपयोगिता समझ में आयेगी. आज कई लोग जब गाय दूध देना छोड़ देती है, तब गाय को आवारा छोड़ देते हैं.
प्रेमलता इन दिनों झारखंड के बोकारो जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में घूम-घूम कर कैंप भी लगा रही है.

रिपोर्ट- चुमन

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