दीदी से भी मुद्दे पर होती थी टकराव
नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिस तरह राज्यपाल जगदीप धनखड़ के
लगातार कठिन सवाल पूछने के अंदाज से हैरान-परेशान थीं,
उस वक्त राहत महसूस कर रही होंगी, जब 71 वर्षीय धनखड़ को एनडीए की तरफ से
उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया.
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री-राज्यपाल के टकराव का सबसे तल्ख और पेचीदा अखाड़ा बना हुआ था,
जुलाई 2019 में धनखड़ जबसे यहां के राज्यपाल बनाए गए.
इसी कड़ी में राज्यपाल धनखड़ को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा ट्विटर पर ब्लॉक किया जाना सभी को याद है.
10 अगस्त को वैंकया नायडू का खत्म हो रहा कार्यकाल
6 अगस्त को उपराष्ट्रपति का चुनाव होगा. 19 जुलाई को नामांकन की आखिरी तारीख है.
11 अगस्त को नये उपराष्ट्रपति शपथ लेंगे.
मौजूदा उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को खत्म हो रहा है.
शनिवार शाम एनडीए की तरफ से जगदीप धनकड़ को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया.
विपक्षी दलों की तरफ से अभी उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की गई है.
हालांकि राष्ट्रपति चुनाव के लिए ममता बनर्जी की पसंद से ही
यशवंत सिन्हा के रूप में विपक्षी दलों का उम्मीदवार घोषित किया गया था.
बंगाल सरकार से पूछे कई कठिन सवाल

30 जुलाई 2019 को जगदीप धनखड़ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बनाए गए थे
और जुलाई 2022 तक तीन साल के दौरान उन्होंने ‘जनता के राज्यपाल’ के रूप में पहचान बनाई.
राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर लोगों का हाल लिया.
राजभवन से बाहर आकर उन्होंने ममता बनर्जी की राज्य सरकार से कोरोना बदइंतजामी,
चुनावी हिंसा और राज्य के तूफान प्रभावितों को लेकर कठिन सवाल पूछे.
राज्य सरकार को असहज करने वाले सवालों के लिए ट्विटर संदेशवाहक बना.
धनखड़ ने की थी ये टिप्पणी
धनखड़ जुलाई में राज्यपाल बने और दिसंबर में जब उन्होंने जाधवपुर विश्वविद्यालय का दौरा किया तो छात्रों ने राज्यपाल को रोक कर काले झंडे दिखाए. राज्यपाल धनखड़ की राज्य सरकार को लेकर एक टिप्पणी काफी मशहूर रही थी, जिसमें उन्होंने चुनावी हिंसा का हवाला देते हुए कहा कि राज्य लोकतंत्र का ‘गैस चैम्बर’ बनता जा रहा है और यहां मानवाधिकार संकट में है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्विटर पर धनखड़ को दिया था ब्लॉक
धनखड़ ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने कई मौकों पर उनकी तरफ से मांगी गई जानकारी नहीं दी और विधानसभा में उनके संबोधन को दो बार ब्लैक आउट कर दिया गया. राज्यपाल के इन्हीं ट्वीट के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्विटर पर उन्हें ब्लॉक कर दिया. ट्विटर का इस्तेमाल धनकड़ ने मुख्यमंत्री को यह बताने के लिए भी किया कि मुख्यमंत्री किस तरह राज्यपाल को जानकारी देने के लिए बाध्य हैं.
मुख्यमंत्री और राज्यपाल के टकराव का चरम 2022 में देखने को मिला जब राज्य सरकार यह विधेयक ले आई कि राज्य के विश्वविद्यालयों का चांसलर अब राज्यपाल नहीं बल्कि मुख्यमंत्री होगा.
कौन हैं जगदीप धनखड़
राजस्थान के झुंझुनू जिले के किठाना गांव में 18 मई 1951 को जन्मे जगदीप धनखड़ की शुरुआती पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल और बाद में छात्रवृत्ति हासिल कर चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल में पढ़े. उन्होंने जयपुर के प्रतिष्ठित महाराजा कॉलेज से बीएससी ऑनर्स की डिग्री ली और राजस्थान विवि से एलएलबी की पढ़ाई की. 1979 में राजस्थान बार काउंसिल के सदस्य बने धनखड़ 1987 में राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बने.
किसान नेता चौधरी देवीलाल के करीबी रहे जगदीप धनखड़
जाट किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले जगदीप धनखड़ दिग्गज किसान नेता चौधरी देवीलाल के करीबी रहे हैं. विश्वनाथ प्रताप सिंह के दौर में वे जनता दल में रहे. 1989 में भाजपा के समर्थन से जनता दल के टिकट पर धनकड़ झुंझुनू लोकसभा सीट से चुनाव जीते और केंद्र में मंत्री बने. हालांकि जनता दल के विभाजन के बाद वे देवेगौड़ा खेमे में गए और वहां टिकट नहीं मिलने पर कांग्रेस में चले गए. अजमेर लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े धनखड़ को हार का सामना करना पड़ा. आखिरकार 2003 में भाजपा में शामिल हुए.
किसान जाट चेहरे पर दांव
जगदीप धनकड़ को एनडीए का उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया जाना अनायास नहीं है. धनकड़ राजस्थान के किसान परिवार और जाट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. उन्होंने जाट बिरादरी को ओबीसी का दर्जा दिलाने के लिए जाट आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई है.
इन राज्यों में है जाट वोटरों की बड़ी संख्या
इसके साथ ही हाल के किसान आंदोलन में जाट समुदाय के किसानों की तादाद बहुत ज्यादा थी, जिसे देखते हुए इस समुदाय को साधने की कोशिश में जगदीप धनखड़ की उम्मीदवारी स्वाभाविक मानी जा रही है. 2023 में राजस्थान और 2024 में हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट वोटरों की बड़ी संख्या है और इन राज्यों के कई निर्वाचन क्षेत्रों में जाट मतदाता ही निर्णायक हैं. इन तथ्यों को देखते हुए जगदीप धनखड़, उपराष्ट्रपति पद के लिए भाजपा की पहली पसंद बने.
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