दिल्ली हाईकोर्ट के जज के आवास से मिली भारी मात्रा में कैश, सुप्रीम कोर्ट आया एक्शन में

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दिल्ली हाईकोर्ट के जज के आवास से मिली भारी मात्रा में कैश
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Desk. दिल्ली हाईकोर्ट के जज के आवास से भारी मात्रा में कैश बरामद होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जज के खिलाफ आरोपों की जांच शुरू कर दी है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से भी रिपोर्ट मांगी है। बताया जा रहा है कि दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से आग लगने की घटना के बाद बड़ी मात्रा में नकद बरामद किया गया है।

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सुप्रीम कोर्ट आया एक्शन में

वहीं सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की संस्तुति के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा को उनके मूल न्यायालय, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वापस ट्रांसफर कर दिया गया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जब भी किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ कदाचार के आरोप लगते हैं, तो संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है।

यदि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ आरोप लगते हैं, तो सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश की पहल पर एक इन-हाउस समिति का गठन किया जाता है। बता दें कि, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति शेखर यादव और कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सी.एस. कर्णन से जुड़े पिछले मामलों में भी इसी प्रकार की प्रक्रिया अपनाई गई थी।

हाईकोर्ट के जज के आवास से मिली भारी मात्रा में कैश

वहीं दिल्ली हाईकोर्ट के जज के आवास से भारी मात्रा में कैश बरामद होने की जानकारी मिलने के बाद सीजेआई संजीव खन्ना ने कॉलेजियम की बैठक बुलाई। बैठक में सर्वसम्मति से जस्टिस वर्मा को वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का फैसला लिया गया, जहां वे अक्टूबर 2021 तक कार्यरत थे।

जजों ने जताई चिंता

कॉलेजियम के कुछ जजों ने चिंता जताई कि जस्टिस वर्मा को केवल स्थानांतरित करने से न्यायपालिका की छवि धूमिल होगी और कानूनी व्यवस्था में लोगों का भरोसा खत्म होगा। उन्होंने जस्टिस वर्मा से स्वेच्छा से इस्तीफा देने की मांग की है। अगर वह इनकार करते हैं, तो संसद में महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

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