रांची: झाविमो (प्रजातांत्रिक) के भाजपा में विलय को लेकर छिड़ी कानूनी जंग बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में फिर तेज हुई। कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान झाविमो के पूर्व प्रमुख और वर्तमान भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर खुद को इस मामले में प्रतिवादी बनाए जाने का आग्रह किया। हाईकोर्ट ने मरांडी की अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें प्रतिवादी बनाने की मंजूरी दे दी है। अब इस मामले में अगली सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद होगी।
मामला वर्ष 2020 से जुड़ा है, जब चुनाव आयोग ने झाविमो के भाजपा में विलय को मंजूरी देते हुए पार्टी के चुनाव चिह्न ‘कंघी’ को जब्त कर लिया था। आयोग के अनुसार, बाबूलाल मरांडी ने लिखित सूचना दी थी कि झाविमो का भाजपा में विलय कर दिया गया है और पार्टी के दो विधायक, प्रदीप यादव और बंधु तिर्की, को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया गया है।
हालांकि, प्रदीप यादव ने इस विलय को चुनौती देते हुए कहा कि झाविमो में मरांडी के अलावा वे स्वयं और बंधु तिर्की भी सदस्य थे। ऐसे में पार्टी का भाजपा में विलय एकतरफा और अनुचित है। उनका तर्क है कि पार्टी के बहुमत के बिना इस तरह का विलय नियम विरुद्ध है।
अब हाईकोर्ट में मरांडी के प्रतिवादी बनने के बाद यह मामला और दिलचस्प मोड़ ले सकता है। झारखंड की राजनीति में इस प्रकरण के कानूनी नतीजों पर भी नजर बनी हुई है।







