पटना : बिहार में 20 साल से ज्यादा वक्त तक सीएम रहे नीतीश कुमार कैबिनेट की आखिरी बैठक का इंतजार बढ़ गया। आज नीतीश कैबिनेट की मीटिंग नहीं होगी। हालांकि, नौ अप्रैल को दिल्ली रवानगी और 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में उनके शपथ ग्रहण का कार्यक्रम फिक्स है। इसके बाद बिहार में नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।
मुख्य सचिवालय में कैबिनेट की बैठक होगी, जिसे CM नीतीश की विदाई के रूप में देखा जा रहा था
आपको बता दें कि पहले मीडिया में जानकारी थी कि मुख्य सचिवालय में कैबिनेट की बैठक होगी, जिसे नीतीश कुमार की विदाई के रूप में देखा जा रहा था। करीब डेढ़ महीने के लंबे अंतराल के बाद कैबिनेट मीटिंग की सूचना थी। कयास लगाए जा रहे थे कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ने से पहले बिहार के लिए कुछ ऐसी योजनाओं और सरकारी नौकरियों के प्रस्तावों को मंजूरी देंगे, जिन्हें उनके कार्यकाल की ‘यादगार विदाई’ के तौर पर देखा जाए। हालांकि, उनका दिल्ली जाना (9 अप्रैल) अबतक तय है, जहां बिहार की सत्ता का नया खाका तैयार होगा।
कैबिनेट मीटिंग को लेकर कल से थी मीडिया में सूचना
नीतीश कैबिनेट की मीटिंग को लेकर मंगलवार से ही मीडिया में सूचना थी कि बुधवार को बैठक संभव है। लेकिन, बुधवार को ऐसी कोई सूचना नहीं दी गई। माना जा रहा था कि नीतीश कुमार अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान जनता से किए गए वादों को अमलीजामा पहनाने के लिए इस बैठक में बड़े वित्तीय आवंटन कर सकते हैं। डेढ़ महीने से कैबिनेट की बैठक न होने के कारण कई फाइलें अटकी हुई हैं, जिन पर आज अंतिम मुहर लगने की संभावना थी। मगर, कैबिनेट मीटिंग को लेकर फिलहाल कोई सूचना नहीं है।
9 अप्रैल को दिल्ली में जदयू की हाई-लेवल मीटिंग
नीतीश कुमार कल दिल्ली में पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों के साथ एक अत्यंत संवेदनशील बैठक करेंगे। इस बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह समेत बड़े नेता शामिल होंगे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा बिहार में सत्ता ट्रांसफर के तौर-तरीकों और भाजपा के साथ नए गठबंधन ढांचे पर चर्चा करना है। यह बैठक महज औपचारिक नहीं, बल्कि भविष्य की सत्ता का ब्लूप्रिंट तैयार करने वाली होगी।
राज्यसभा सदस्यता के साथ ऐतिहासिक रिकॉर्ड
10 अप्रैल को नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसी के साथ वे भारतीय राजनीति के उन विरले नेताओं की सूची में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने संसद (लोकसभा, राज्यसभा) और राज्य विधानमंडल (विधानसभा, विधान परिषद) के चारों सदनों की सदस्यता हासिल की है। यह शपथ ग्रहण उनके राष्ट्रीय राजनीति में औपचारिक प्रवेश और बिहार की सक्रिय मुख्यमंत्री की भूमिका से हटने का आधिकारिक संकेत होगा।
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