Clinical Establishment Act:झारखंड में डॉक्टर क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन चाहते हैं। 50 बेड से कम क्लिनिक को एनओसी में छूट देने की मांग से इलाज सस्ता होने की उम्मीद।
Clinical Establishment Act रांची:झारखंड में क्लीनिक और छोटे अस्पताल चलाने वाले डॉक्टर अब क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन की मांग को लेकर खुलकर सामने आ गए हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले राज्य के डॉक्टरों का कहना है कि बिहार और उत्तर प्रदेश की तरह झारखंड में भी 50 बेड तक के क्लिनिक और छोटे अस्पतालों को नियमों में राहत मिलनी चाहिए, ताकि मरीजों और डॉक्टरों दोनों को लाभ हो सके।
Clinical Establishment Act:पड़ोसी राज्यों का उदाहरण दे रहे डॉक्टर
डॉक्टरों का कहना है कि बिहार और उत्तर प्रदेश में 50 बेड तक के क्लिनिक और छोटे अस्पतालों को कई प्रकार की छूट दी गई है। इसका सीधा फायदा मरीजों को मिल रहा है। छोटी बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को बड़े और कॉरपोरेट अस्पतालों में अनावश्यक खर्च नहीं करना पड़ता।
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मरीजों को भी छोटी बीमारी के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ता। डॉक्टरों का मानना है कि यदि झारखंड में भी क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के सेक्शन 45 में संशोधन किया जाए, तो राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं और सुलभ हो सकती हैं।
Key Highlights
झारखंड के डॉक्टरों ने क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन की मांग उठाई
50 बेड तक के क्लिनिक और छोटे अस्पतालों को राहत देने की मांग
एनओसी प्रक्रिया को बताया जटिल और खर्च बढ़ाने वाली
बिहार और उत्तर प्रदेश के मॉडल का हवाला
आईएमए ने सरकार को संशोधन के लिए अल्टीमेटम दिया
Clinical Establishment Act:रजिस्ट्रेशन पर सहमति, एनओसी में चाहते हैं राहत
राज्य के डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि उन्हें क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट के तहत पंजीयन कराने से कोई आपत्ति नहीं है। उनकी मुख्य मांग नगर निगम, फायर फाइटिंग और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित एनओसी की प्रक्रिया में छूट देने की है।
डॉक्टरों का कहना है कि इन एनओसी की प्रक्रिया काफी जटिल और समय लेने वाली है। इससे छोटे क्लिनिक और अस्पताल खोलना मुश्किल हो जाता है। यदि इस प्रक्रिया में राहत मिल जाए, तो इलाज की लागत भी कम होगी।
Clinical Establishment Act: आईएमए ने सरकार को दिया अल्टीमेटम
झारखंड आईएमए ने क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन की मांग को लेकर सरकार को अल्टीमेटम दिया है। स्टेट आईएमए सचिव डॉ प्रदीप सिंह ने कहा कि एक्ट के तहत पंजीयन, मरीजों के हित और चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी देने से डॉक्टरों को कोई परहेज नहीं है।
उनका कहना है कि केवल नगर निगम, फायर फाइटिंग और प्रदूषण से संबंधित एनओसी की बाध्यता में राहत दी जाए। इससे शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी 50 बेड से कम के क्लिनिक और छोटे अस्पताल खुल सकेंगे और मरीजों को सस्ती दर पर इलाज की सुविधा मिलेगी।
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