धनबाद एसएनएमसीएच में आदिवासी महिला का बच्चा चोरी, 36 घंटे में पुलिस ने भूली के रेगुनी से नवजात को बरामद किया। अस्पताल में विरोध और सुरक्षा सवालों ने चिंता बढ़ाई।
Dhanbad SNMCH Baby Theft: एसएनएमसीएच (Shaheed Nirmal Mahto Medical College and Hospital) में नवजात शिशु चोरी की घटना ने जिले में हड़कंप मचा दिया। हालांकि पुलिस ने महज 36 घंटे में बच्चा बरामद कर मामले में राहत दी है।
Dhanbad SNMCH Baby Theft: 36 घंटे में पुलिस की बड़ी कामयाबी
धनबाद पुलिस को सूचना मिलने के बाद सरायढेला थाना टीम ने कई इलाकों में सर्च अभियान चलाया। पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच की मदद से भूली के रेगुनी में छापेमारी की गई, जहां बच्चा बरामद किया गया। फिलहाल इस मामले में कुछ लोगों से पूछताछ की जा रही है और पुलिस जल्द गिरफ्तारी की बात कह रही है।
• एसएनएमसीएच धनबाद से नवजात शिशु चोरी का मामला•
36 घंटे में सरायढेला थाना पुलिस ने भूली रेगुनी से बच्चा बरामद किया
• आदिवासी समाज ने अस्पताल परिसर में डुगडुगी बजाकर विरोध जताया
• गाइनो वार्ड में हरवा हथियार लहराकर सुरक्षा पर सवाल उठाए
• मामले की जांच जारी, पुलिस जल्द कर सकती है गिरफ्तारी
Dhanbad SNMCH Baby Theft: अस्पताल में भड़का आदिवासी समाज, डुगडुगी और हरवा हथियार के साथ प्रदर्शन
नवजात चोरी की खबर के बाद आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पारंपरिक डुगडुगी बजाकर विरोध जताया और हरवा हथियार लहराते हुए गाइनो वार्ड के बाहर प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि सुरक्षा में लापरवाही के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो और बच्चे को तत्काल परिवार को सौंपा जाए।
स्थिति तनावपूर्ण होते देख अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस बल तैनात किया और लोगों को शांत कराया।
Dhanbad SNMCH Baby Theft: अस्पताल की सुरक्षा पर उठे सवाल
घटना ने एसएनएमसीएच की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। परिजन का आरोप है कि वार्ड में सुरक्षा और निगरानी पर्याप्त नहीं थी, जिसके कारण नवजात आसानी से चोरी हो गया। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और अस्पताल प्रबंधन को भी सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
Dhanbad SNMCH Baby Theft: पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
एसएनएमसीएच की यह घटना कोई पहली नहीं है। इससे पहले भी झारखंड और आसपास के राज्यों के सरकारी अस्पतालों में नवजात शिशु चोरी के मामले सामने आ चुके हैं। राजधानी रांची के रिम्स (RIMS) सहित कुछ बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में बीते वर्षों में नवजात के गायब होने की घटनाओं ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया था। कई मामलों में सीसीटीवी खराब होने, वार्ड में बाहरी लोगों की आवाजाही और सुरक्षा गार्डों की कमी को कारण बताया गया।
सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती
बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के सरकारी अस्पतालों में भी महिला या नवजात शिशु चोरी के मामले समय-समय पर रिपोर्ट होते रहे हैं। कई मामलों में बच्चे को निजी दत्तक गिरोह से जोड़कर देखा गया, जबकि कुछ मामलों में पुलिस ने समय रहते नवजात को बरामद भी किया। इन घटनाओं ने यह साफ किया है कि प्रसूति और गाइनो वार्ड सबसे संवेदनशील क्षेत्र होते हैं, जहां अतिरिक्त निगरानी की जरूरत होती है।
बार-बार घटनाओं के बावजूद ठोस व्यवस्था पर सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि हर घटना के बाद जांच और निर्देश तो दिए जाते हैं, लेकिन स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू नहीं हो पाती। अस्पतालों में बायोमेट्रिक एंट्री, मां-बच्चे की टैगिंग, सक्रिय सीसीटीवी निगरानी और प्रशिक्षित महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती अब समय की मांग बन चुकी है। धनबाद एसएनएमसीएच की ताजा घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था को आईना दिखाया है।
अस्पतालों में नवजात चोरी: तारीख-वार सारांश और तथ्य
1 जनवरी 2019 – रांची RIMS में नवजात गायब
रांची के राजकीय RIMS अस्पताल से एक नवजात बच्चा बिना जानकारी के गायब होने की घटना सामने आई। परिवार ने शिकायत की कि वार्ड में सीसीटीवी खराब था और सुरक्षा कर्मी अनुपस्थित थे। तत्कालीन पुलिस ने जांच की, लेकिन बच्चा बरामद नहीं हो सका। इस घटना ने अस्पतालों में सीसीटीवी और निगरानी पर सवाल खड़े किए।
15 जुलाई 2020 – पटना Sadar अस्पताल में झूठा अपहरण दावा
पटना के एक सरकारी अस्पताल में एक महिला ने आरोप लगाया कि उसके नवजात को अस्पताल से चोरी किया गया। जांच में पता चला कि मामला गलत संचार और रिकॉर्ड की त्रुटि के कारण आया था, और बच्चा असल में परिवार के साथ ही सुरक्षित था। यह घटना यह दिखाती है कि सदस्यता और होने वाली भ्रांतियाँ किस तरह गलतफहमियों को जन्म दे सकती हैं।
8 मार्च 2021 – मध्य प्रदेश, भोपाल सरकारी अस्पताल
भोपाल के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में महिला के नवजात के गायब होने की रिपोर्ट सामने आई। पुलिस और प्रशासन ने जब सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की, तो देखा गया कि बच्चा उसी वार्ड में था परंतु टैगिंग नहीं हुई थी। इस पर अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए गए कि मां-बच्चे पर टैगिंग प्रणाली अनिवार्य रूप से लागू की जाए।
22 सितंबर 2022 – झारखंड, जमशेदपुर
जमशेदपुर के एक सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिला के नवजात के गायब होने की खबर आई। इस पर प्रशासन ने बयान जारी किया कि वार्ड में वॉक-इन अनुमति और सुरक्षा गार्ड की कमी वजह बनी। पुलिस ने नाविक-रेड क्रूस जैसे क्षेत्र में खोज अभियान चलाया और नवजात सुरक्षित बरामद हुआ। यह घटना अस्पताल सुरक्षा में सुधार की आवश्यकता को दर्शाती है।
29 दिसंबर 2025 – धनबाद SNMCH
ताजा मामला एसएनएमसीएच, धनबाद से सामने आया जहाँ एक आदिवासी महिला के नवजात को चोरी होने का आरोप लगा। पुलिस ने 36 घंटे के भीतर भूली-रेगुनी से नवजात को बरामद कर लिया, और पूछताछ जारी है। अस्पताल परिसर में आदिवासी समाज ने प्रदर्शन किया, डुगडुगी बजाई, और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। इस घटना ने फिर से अस्पतालों में सुरक्षा और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की जरूरत उजागर की है।
इन घटनाओं से क्या सीख मिलती है?
सीसीटीवी निगरानी जरूरी
कई मामलों में सीसीटीवी खराब, अधूरा या अनुपलब्ध पाया गया। इससे घटना के समय की पुष्टि और सबूत इकट्ठा करना मुश्किल होता है।मां-बच्चे टैगिंग का अभाव
न तो सभी सरकारी अस्पतालों में बायो-टैगिंग होती है, जिससे नवजातों को ट्रैक करना कठिन हो जाता है।सुरक्षा कर्मियों की कमी
वार्ड, प्रवेश द्वार और प्रसूति विभाग में ट्रेन गार्डों की कमी कई घटनाओं का एक बड़ा कारण रही है।प्रशासनिक प्रतिक्रिया में सुधार आवश्यक
हर घटना के बाद जांच जरूर होती है, लेकिन लंबी अवधि के समाधान लागू नहीं हो रहे, जिसकी कई बार आलोचना हुई है।
हालांकि धनबाद पुलिस ने 36 घंटे में नवजात को सुरक्षित बरामद कर सराहनीय कार्य किया है, लेकिन लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर सुधार की जरूरत है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
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