पाकुड़: झारखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत कर दी है। इसके साथ ही कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी ने विधानसभावार योग्य और लोकप्रिय उम्मीदवारों की तलाश शुरू कर दी है। इस बार कांग्रेस ने चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों से आवेदन मांगे थे, जिसमें पाकुड़ विधानसभा सीट सबसे ज्यादा चर्चा में है। यह सीट पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक आलमगीर आलम का गढ़ मानी जाती है, जो फिलहाल भ्रष्टाचार के मामले में जेल में बंद हैं।
इस बार आलमगीर आलम ने जेल में बंद होने के बावजूद अपनी उम्मीदवारी के लिए आवेदन किया है। उनके अलावा उनके बेटे तनवीर आलम और पत्नी निशत आलम ने भी पाकुड़ से टिकट के लिए आवेदन किया है। एक ही परिवार के तीन सदस्यों द्वारा टिकट की दावेदारी के कारण विपक्षी दल भाजपा इसे कांग्रेस में परिवारवाद का उदाहरण बता रही है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता जेबी तुबिद ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में अधिकांश नेताओं की यही कोशिश होती है कि सत्ता उनके परिवार में ही रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि आलमगीर आलम के नौकर के पास से ED को 32 करोड़ रुपये मिले थे, और इसीलिए आलमगीर आलम जेल में हैं। तुबिद का कहना है कि अगर आलमगीर आलम चुनाव नहीं लड़ सके, तो उनकी पत्नी या बेटा विधायक बन जाएंगे। इसी मंशा के साथ तीनों ने आवेदन जमा किए हैं।
इस पर कांग्रेस ने जवाब देते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और किसी भी व्यक्ति को चुनाव में भाग लेने का अधिकार है। कांग्रेस मीडिया सेल के अध्यक्ष सतीश पॉल ने कहा कि उम्मीदवार का चयन कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी, जिला अध्यक्ष और आलाकमान के फैसले के आधार पर ही फाइनल होगा। उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि परिवारवाद पर बोलने का भाजपा को कोई हक नहीं है क्योंकि उनकी पार्टी में भी कई नेता वंशवाद की राजनीति का उदाहरण हैं।
पाकुड़ विधानसभा सीट पर परिवारवाद की चर्चा के अलावा, झारखंड के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। बड़कागांव की विधायक अंबा प्रसाद, उनके पिता पूर्व मंत्री योगेंद्र साव, और छोटी बहन अनुप्रिया ने भी हजारीबाग विधानसभा सीट से दावेदारी की है। कांग्रेस इसे लोकतंत्र का हिस्सा बता रही है, जबकि भाजपा इसे परिवारवाद का नाम दे रही है।


