कोल्हान में चुनावी संग्राम: चार-चार ‘राजा’ दांव पर, जनता किसे चुनेगी किंगमेकर?

रांची: झारखंड की राजनीति में कोल्हान प्रमंडल का विशेष स्थान है। यह क्षेत्र केवल चुनावी नतीजे तय नहीं करता, बल्कि सत्ता की दिशा भी निर्धारित करता है। राज्य की 81 सीटों में से कोल्हान प्रमंडल की 14 सीटें एक निर्णायक भूमिका निभाती हैं, और यहां के नतीजे सत्ता परिवर्तन में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में झामुमो ने इस क्षेत्र में बड़ा प्रदर्शन करते हुए 11 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा एक भी सीट नहीं हासिल कर सकी थी। भाजपा की हार ने इस क्षेत्र में उसकी स्थिति कमजोर कर दी थी, जिससे राज्य की सत्ता से भी उसका हाथ फिसल गया।

इस बार, कोल्हान प्रमंडल फिर से चुनावी समर का केंद्र बना हुआ है, और दोनों ही प्रमुख दल—सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और विपक्षी भाजपा—यहां जीत के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। भाजपा को इस बार का चुनावी समीकरण अपने पक्ष में मोड़ने की उम्मीद है, खासकर क्योंकि झामुमो के प्रमुख नेता चम्पाई सोरेन और मधु कोड़ा इस बार भाजपा में शामिल हो गए हैं। चम्पाई के भाजपा में आने के बाद, झामुमो ने उनकी जगह घाटशिला से रामदास सोरेन को मंत्री पद देकर क्षेत्र में अपनी प्राथमिकता साफ कर दी है।

कोल्हान प्रमंडल में पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले आते हैं, और यह क्षेत्र अब तक झारखंड को चार मुख्यमंत्री दे चुका है—अर्जुन मुंडा, मधु कोड़ा, रघुवर दास, और चम्पाई सोरेन। इनमें से रघुवर दास, जो झारखंड के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री रहे हैं, इस बार चुनावी मैदान में नहीं हैं, लेकिन उनकी बहू पूर्णिमा दास जमशेदपुर पूर्वी से भाजपा की प्रत्याशी हैं। इसके अलावा, मधु कोड़ा और उनकी पत्नी गीता कोड़ा भी कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम चुके हैं, जिससे भाजपा को इस क्षेत्र में समर्थन मिलने की संभावना बढ़ गई है।

कोल्हान प्रमंडल की सीटों का विशेष स्वरूप इसे महत्वपूर्ण बनाता है। यहां की 14 सीटों में 9 सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) और 1 सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित हैं, जबकि 4 सीटें अनारक्षित हैं। झामुमो ने 2019 में यहां के बहरागोड़ा, बाटशिला, पोटका, जुगसलाई, ईचागढ़, सरायकेला, चाईबासा, मझगांव, मनोहरपुर, चक्रधरपुर और खरसावां सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस ने जमशेदपुर पश्चिमी और जगन्नाथपुर सीट पर कब्जा जमाया था, जबकि निर्दलीय सरयू राय ने जमशेदपुर पूर्वी में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास को हराकर जीत हासिल की थी। सरयू राय अब भाजपा के साथ हैं और इस बार जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।

2009 और 2014 के विधानसभा चुनावों में भाजपा और एनडीए का कोल्हान में दबदबा था। 2014 में मोदी लहर के चलते भाजपा ने यहां 14 में से 6 सीटें जीती थीं—बहरागोड़ा, घाटशिला, पोटका, जमशेदपुर पूर्वी, जमशेदपुर पश्चिमी और ईचागढ़। हालांकि, 2019 में झामुमो, कांग्रेस और राजद के गठबंधन ने भाजपा का सूपड़ा साफ कर दिया था। 2009 के चुनाव में भी भाजपा ने 14 में से 6 सीटें जीती थीं, और अन्य सीटों पर झामुमो, कांग्रेस, आजसू, जेवीएम और निर्दलीय उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया था।

इस बार का चुनाव 2019 से काफी अलग है। चम्पाई सोरेन, मधु कोड़ा और गीता कोड़ा जैसे पूर्व झामुमो और कांग्रेस नेताओं का भाजपा में आना यहां नए समीकरण बना रहा है। झामुमो के लिए इस बार कोल्हान में अपना वर्चस्व बनाए रखना एक चुनौती है, जबकि भाजपा अपनी खोई हुई जमीन फिर से हासिल करने के प्रयास में है। कोल्हान प्रमंडल के इन चारों दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है, और यह देखना रोचक होगा कि जनता किसे इस चुनाव में ‘किंगमेकर’ के रूप में चुनेगी।

 

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