रांची: रिम्स (राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान) के निदेशक डॉ. राजकुमार को गुरुवार की देर रात उनके पद से हटा दिया गया। रिम्स की शासी परिषद ने एक आदेश जारी कर बताया कि डॉ. राजकुमार ने अपने कार्यकाल के दौरान मंत्रिपरिषद, शासी परिषद और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन नहीं किया। परिषद ने इस आधार पर उनकी सेवाओं को असंतोषजनक करार देते हुए तत्काल प्रभाव से पद से हटाने का निर्णय लिया।
स्वास्थ्य मंत्री और रिम्स शासी परिषद के अध्यक्ष डॉ. इरफान अंसारी ने बताया कि डॉ. राजकुमार ने रिम्स अधिनियम-2002 द्वारा निर्धारित उद्देश्य की पूर्ति में विफलता दिखाई। इसलिए उन्हें तीन माह का वेतन-भत्ता देते हुए निदेशक पद से हटाया गया। इस निर्णय को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मंजूरी भी प्राप्त हुई है।
सूत्रों के अनुसार, हालिया शासी परिषद की बैठक में डॉ. राजकुमार का व्यवहार विवादास्पद रहा। वे स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव से हेल्थ मैप और मेडॉल के भुगतान के मुद्दे पर उलझ गए। उन्होंने सचिव को अमर्यादित भाषा में कहा कि अगर भुगतान जरूरी है तो वे खुद कर दें। यह टिप्पणी न सिर्फ आपत्तिजनक मानी गई, बल्कि शासकीय गरिमा के खिलाफ भी थी।
इसके अलावा, डॉ. राजकुमार पर यह भी आरोप है कि उन्होंने राज्य सरकार की अनुमति के बिना लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई (संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान) में एक दिन का योगदान दिया ताकि वहां से सेवानिवृत्ति का लाभ ले सकें। इस पर राज्य सरकार ने आपत्ति जताई है और यूपी सरकार से उनकी सेवा और योगदान से संबंधित पूरी जानकारी मांगी है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जीबी की बैठक में जब विभागीय कामकाज की समीक्षा हुई, तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कामकाज की रफ्तार बेहद धीमी थी और कई स्तरों पर सरकारी निर्देशों की अनदेखी हो रही थी। डॉ. राजकुमार पर विशेष रूप से कार्यशैली को लेकर सवाल उठे, जिसमें जवाबदेही से बचने और लापरवाही का रवैया प्रमुख रहा।







