जेपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति: 7 साल बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, इंटरव्यू के लिए 10 से प्रक्रिया शुरू

जेपीएससी ने 7 साल बाद 34 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की तारीख जारी की। इंटरव्यू जल्द, हाईकोर्ट ने मेडिकल अफसरों को राहत दी।


रांची: जेपीएससी ने 34 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए लंबित नियुक्ति प्रक्रिया को फिर से शुरू कर दिया है। सात साल से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह बड़ी राहत है। आयोग ने 10 सितंबर से डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की नई तिथि जारी की है।

रांची यूनिवर्सिटी समेत राज्य के पांच विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी विषय के लिए निकले इन पदों पर उम्मीदवार अपने दस्तावेजों का सत्यापन करा सकेंगे। वेरिफिकेशन के बाद रिक्त पदों के मुकाबले तीन गुना उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। इंटरव्यू की तारीख बाद में घोषित की जाएगी।

पिछले साल 12 जून को भी आयोग ने डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराया था, लेकिन उस दौरान बहुत कम उम्मीदवार पहुंचे थे, जिससे प्रक्रिया अधर में अटक गई थी।


Key Highlights

  • 7 साल बाद जेपीएससी ने 34 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए प्रक्रिया फिर शुरू की

  • 10 सितंबर से डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, इंटरव्यू बाद में

  • 2018 में 1118 पदों पर शुरू हुई थी भर्ती प्रक्रिया

  • रांची समेत पांच विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी विषय के लिए रिक्तियां

  • हाईकोर्ट ने मेडिकल अफसरों को 2002 से डीएसीपी लाभ देने का निर्देश दिया


2018 से लटकी प्रक्रिया

जेपीएससी ने 2018 में झारखंड के पांच विश्वविद्यालयों में 1118 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। इनमें 552 नियमित और 566 बैकलॉग पद शामिल थे। हालांकि सात साल बीत जाने के बाद भी कई विषयों में नियुक्ति पूरी नहीं हो सकी है।

किस विश्वविद्यालय में कितने पद

  • रांची यूनिवर्सिटी – 4

  • विनोबा भावे यूनिवर्सिटी – 4

  • सिदो-कान्हू मुर्मू यूनिवर्सिटी – 6

  • नीलांबर-पीतांबर यूनिवर्सिटी – 11

  • कोल्हान यूनिवर्सिटी – 9

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला मेडिकल अफसरों के पक्ष में

इधर झारखंड हाईकोर्ट ने मेडिकल कैडर के अफसरों को 2002 से डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) का लाभ देने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि समान श्रेणी के कर्मचारियों के बीच भेदभाव नहीं किया जा सकता। झारखंड सरकार ने योजना 2002 से लागू की थी, लेकिन बाद में कट ऑफ डेट बदलकर 2008 कर दिया था, जिससे कई डॉक्टर प्रभावित हुए।

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