ग्रामीण सड़कों के निर्माण में 7 सालों की होगी मेंटेनेंस पॉलिसी, मंत्री ने कहा…

ग्रामीण सड़कों पर सरकार का बड़ा दांव। ग्रामीण सड़कों के निर्माण में 7 सालों की होगी मेंटेनेंस पॉलिसी, सड़कों को मिलेगी लंबी उम्र। ग्रामीण सड़कों के निर्माण में ठेकेदारों की उपयोगिता बनी रहेगी, होगा सही रख रखाव। फर्जीवाड़े पर होगी सख्ती गलत कागजात या ब्लैकलिस्टेड कंपनियों पर टेंडर लेने वालों पर होगी एफआईआर। 24,480 KM सड़कों को मिली मंजूरी, मेंटेनेंस पॉलिसी से बदलेगा बिहार का चेहरा। कोई ग्लोबल टेंडर नहीं, नेशनल टेंडरिंग से मिलेगा छोटे ठेकेदारों को लाभ। भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही, हम प्रदेश और देश के ठेकेदारों को लाभ देने के पक्ष में : मंत्री

पटना: बिहार में ग्रामीण संपर्क और आधारभूत संरचना को मजबूती देने के लिए नीतीश सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने बुधवार को मीडिया को बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,036 पथों की स्वीकृति दी गई है, जिनकी कुल लंबाई 24,480 किलोमीटर है। साथ ही 2025-26 में अब तक 4,079 पथों (6,484 किमी) की स्वीकृति भी मिल चुकी है। मंत्री चौधरी ने कहा कि विभाग की ओर से एक नई कार्य कुशल और पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है। इससे न केवल काम की गुणवत्ता बढ़ी है, बल्कि सरकारी खजाने को भी लाभ हुआ है। अब तक करीब 800 करोड़ रुपये की बचत सरकार ने की है।

कोई ग्लोबल टेंडर नहीं, नेशनल टेंडरिंग से मिलेगा छोटे ठेकेदारों को लाभ

मंत्री ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से कोई ग्लोबल टेंडर आमंत्रित नहीं किया गया है, बल्कि नेशनल विडिंग के तहत टेंडर निकाले गए हैं। ताकि इससे राज्य और देश के छोटे ठेकेदारों को मौका मिले। उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं कि बड़े-बड़े पैकेज बनाए गए हैं और छोटे ठेकेदारों को मौका नहीं मिलेगा, जबकि हकीकत ये है कि छोटे-छोटे पैकेज बनाए गए हैं। ताकि प्रखंड और अनुमंडल स्तर तक के ठेकेदारों को लाभ मिले। मंत्री ने कहा, हम छोटे पैकेज तैयार करवा रहे हैं।

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7 सालों की होगी मेंटेनेंस पॉलिसी, सड़कों को मिलेगी लंबी उम्र

बिहार सरकार के मंत्री ने कहा कि ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता और स्थायित्व बनाए रखने के लिए सरकार ने मेंटेनेंस पॉलिसी को प्रभावी रूप से लागू किया है। अब तक 18,000 सड़कों को इस पॉलिसी से जोड़ा है। मंत्री चौधरी ने बताया कि ‘पिछले दो महीनों में 464 पैकेज का कार्य आवंटन किया गया है। इस पैकेज के तहत सात साल तक इन सड़कों का नियमित रख-रखाव सुनिश्चित किया जाएगा। इससे लंबी अवधि तक इन ठेकेदारों की उपयोगिता बनी रहेगी साथ ही सड़कों का सही रख रखाव भी संभव हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना की फिर से शुरुआत

एक और अहम घोषणा करते हुए मंत्री ने बताया कि 9 साल बाद मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना की दोबारा शुरुआत की गई है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-बड़े पुलों और पुलियों का निर्माण तेजी से किया जाएगा। इससे आवागमन में सहूलियत होगी और सड़कों की गुणवत्‍ता भी ठीक रहेगी।

टोले-टोले तक पहुंचेगी सड़क

बिहार सरकार के मंत्री ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता यह रही है कि 100 से अधिक आबादी वाले हर टोले को पक्की सड़क से जोड़ा जाए। मंत्री ने बताया कि, अब तक 5003 टोलों को जोड़ते हुए 6,538 किलोमीटर लंबी सड़कों को स्वीकृति दी जा चुकी है। सरकार 1,200 किलोमीटर अतिरिक्त पथ की स्वीकृति की दिशा में तेजी से कार्रवाई चल रही है।

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ठेकेदारों की निगरानी और फर्जीवाड़े पर सख्ती

मंत्री अशोक चौधरी ने बताया कि कुछ ठेकेदार गलत कागजात या ब्लैकलिस्टेड कंपनियों के नाम पर टेंडर लेने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे मामलों को चिन्हित कर विभागीय कार्रवाई की जा रही है। इस तरह के ठेकेदारों पर सरकार सख्‍त है। ऐसा करने वालों पर जल्द ही FIR की जाएगी। अब तक केवल 2-3 झारखंड के ठेकेदार और 2 उत्तर प्रदेश से आए हैं। इससे स्पष्ट है कि स्थानीय और क्षेत्रीय ठेकेदारों को पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं।

चुनाव से पहले सड़कों पर काम शुरू करने का लक्ष्य : अशोक चौधरी

आने वाले चुनावों को देखते हुए सरकार पूरी तरह से मुस्‍तैद है। मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, ‘हमारी प्राथमिकता ये है कि चुनाव से पहले सभी स्वीकृत सड़कों का कार्य प्रारंभ हो जाए। ताकि चुनाव के दौरान भी ग्रामीण सड़कों के विकास का काम प्रभावित न हो। इसके लिए विभाग पूरी तत्पर है। उन्‍होंने कहा, से काम कर रहा है।

ग्रामीण कनेक्टिविटी में क्रांति की ओर बिहार

ग्रामीण कार्य विभाग की इन पहलों से यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ग्रामीण कनेक्टिविटी के मामले में देश में एक नई मिसाल कायम करने की ओर बढ़ रहा है। अब न केवल गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ा जा रहा है, बल्कि उनके रखरखाव और गुणवत्ता को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इस पहल को न यह सिर्फ सड़क निर्माण बल्कि एक नया बिहार गढ़ने की नींव के रूप में देखा जा रहा है।

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