नीतीश कैबिनेट की बैठक संपन्न, कुल 43 मामलों पर लगी मुहर

नीतीश कैबिनेट की बैठक संपन्न, कुल 43 मामलों पर लगी मुहर

पटना :   मुख्यमंत्री सचिवालय के कैबिनेट हॉल में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक कई मायनों में बेहद अहम रही। इस बैठक में कुल 43 एजेंडों पर विस्तार से चर्चा के बाद स्वीकृति दी गई। बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा सहित सभी विभागों के मंत्री मौजूद रहे। लंबे अंतराल के बाद हुई यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसके फैसलों का सीधा असर राज्य के प्रशासन, विकास योजनाओं और अंतरराज्यीय समन्वय पर पड़ने वाला है।

कैबिनेट बैठक का व्यापक महत्व

यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब मुख्यमंत्री 16 जनवरी से राज्यव्यापी दौरे पर निकलने वाले हैं। इस दौरे के दौरान वे विभिन्न जिलों में विकास योजनाओं की समीक्षा करेंगे और आम जनता से संवाद करेंगे। ऐसे में कैबिनेट के फैसलों को आगामी यात्रा के लिए ठोस आधार के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले 16 दिसंबर 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में केवल एक एजेंडे पर मुहर लगी थी, जिसमें सात निश्चय-3 कार्यक्रम को स्वीकृति दी गई थी। इस बार की बैठक अपेक्षाकृत व्यापक रही और इसमें कई विभागों से जुड़े अहम निर्णय लिए गए।

बाणसागर समझौता और जल बंटवारे का फैसला

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय बाणसागर समझौते के तहत बिहार और झारखंड के बीच पानी के बंटवारे को लेकर रहा। लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर कैबिनेट ने समझौता पत्र को मंजूरी दे दी। इसके तहत बिहार को 5.75 मिलियन एकड़ फीट और झारखंड को 2.00 मिलियन एकड़ फीट पानी देने पर सहमति बनी है। इस फैसले को दोनों राज्यों के बीच सहयोग और संतुलित संसाधन वितरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जल बंटवारे के इस निर्णय से कृषि, सिंचाई और औद्योगिक विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

गयाजी में औद्योगिक विकास को बढ़ावा

कैबिनेट बैठक में गया में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर को उच्च गुणवत्ता की बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का भी फैसला लिया गया। इसके लिए चंदौती ग्रिड से IMC, गया तक 220 केवी की बिजली लाइन बिछाई जाएगी। इस परियोजना के लिए सरकार ने 33 करोड़ 29 लाख रुपये की नई योजना को मंजूरी दी है। यह निर्णय राज्य में औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बेहतर बिजली आपूर्ति से उद्योगों की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

कृषि विभाग में पदों का सृजन और पुनर्गठन

नीतीश सरकार ने कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में भी बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने कृषि विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 534 पदों और पौध संरक्षण निरीक्षक के 160 पदों के सृजन एवं पुनर्गठन की स्वीकृति दी है। इस तरह कुल 694 पदों को मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे कृषि प्रशासन मजबूत होगा, किसानों को बेहतर तकनीकी सहायता मिलेगी और फसल सुरक्षा से जुड़े कार्यों में तेजी आएगी। यह कदम राज्य की कृषि व्यवस्था को अधिक संगठित और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुंबई में बिहार भवन निर्माण की स्वीकृति

बैठक में एक और अहम निर्णय मुंबई में बिहार भवन के निर्माण को लेकर लिया गया। इसके लिए 314 करोड़ 20 लाख 59 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। मुंबई जैसे बड़े महानगर में बिहार भवन का निर्माण राज्य के लोगों के लिए सुविधाजनक होगा। इससे वहां रहने या काम करने वाले बिहारवासियों को सरकारी और सामाजिक गतिविधियों में सहूलियत मिलेगी। साथ ही यह भवन बिहार की सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक उपस्थिति को भी मजबूत करेगा।

शिक्षा विभाग से जुड़े फैसले

कैबिनेट बैठक में शिक्षा विभाग के जन शिक्षा निदेशालय में विभिन्न श्रेणियों के 9 नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई। सरकार का उद्देश्य शिक्षा प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना और नीतियों के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करना है। यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था के सुचारु संचालन में सहायक माना जा रहा है।

आगामी समृद्धि यात्रा और कैबिनेट फैसलों का संबंध

मुख्यमंत्री की 16 जनवरी से शुरू होने वाली समृद्धि यात्रा के मद्देनजर यह कैबिनेट बैठक विशेष महत्व रखती है। माना जा रहा है कि बैठक में लिए गए फैसले यात्रा के दौरान विकास कार्यों की समीक्षा और नई योजनाओं की घोषणा के लिए मजबूत आधार तैयार करेंगे। जल बंटवारे, औद्योगिक विकास, कृषि सुदृढ़ीकरण और आधारभूत संरचना से जुड़े ये निर्णय सरकार की विकासोन्मुख नीति को दर्शाते हैं। नीतीश कैबिनेट की इस बैठक में लिए गए 43 निर्णय राज्य के दीर्घकालिक विकास, प्रशासनिक मजबूती और अंतरराज्यीय सहयोग की दिशा में अहम साबित हो सकते हैं। इन फैसलों से न केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आम जनता को भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है।

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