पटना : भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) पटना ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर लोक भवन पटना में ‘मैं बिहार हूं’ विषय पर आधारित कथक नृत्य की प्रस्तुति का आयोजन किया। यह प्रस्तुति स्वाति सिन्हा के नेतृत्व में आठ सदस्यों के टीम द्वारा कथक नृत्य के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम आईसीसीआर पटना के होराइजन श्रृंखला के अंतर्गत लोक भवन के सहयोग से संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। इसका उद्घाटन बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा किया गया। पटना की मूल निवासी एवं दिल्ली में रहने वाली स्वाति सिन्हा एक जानी-मानी कथक कलाकार हैं। जिन्होंने गुरु पंडित राजेंद्र गंगानी से प्रशिक्षण लिया है और उन्हें 25 वर्षो का लंबा और समृद्ध अनुभव है।
इस मौके पर लगभग 500 वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, बिहार के राजनेता और समाज के विभिन्न क्षेत्रों’ से जुड़े जाने-माने व्यक्ति मौजूद रहे
इस मौके पर लगभग 500 वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, बिहार के राजनेता और समाज के विभिन्न क्षेत्रों’ से जुड़े जाने-माने व्यक्ति मौजूद रहे, जो इस दिन के संवैधानिक महत्व और राष्ट्रीय भावना को दर्शाता है। समारोह के एक मुख्य सांस्कृतिक अंग के रूप में प्रख्यात शास्त्रीय नृत्यांगना स्वाति सिन्हा और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत ‘मैं बिहार हूं’ शीर्षक वाली कथक प्रस्तुति, कथक की शास्त्रीय भाषा में अभिव्यक्त बिहार की सभ्यता गत यात्रा और पहचान का एक नृत्य-सह-संगीत की प्रस्तुति थी।

इस प्रस्तुति में बिहार की ऐतिहासिक गहराई और जीवंत सांस्कृतिक अनुभव का सशक्त चित्रण दर्शाया गया
इस प्रस्तुति में बिहार की ऐतिहासिक गहराई और जीवंत सांस्कृतिक अनुभव का सशक्त चित्रण दर्शाया गया। जिसमें गंगा, सोन और गंडक नदियों को निरंतरता और सामूहिक स्मृति के शाश्वत प्रतीकों के रूप में दिखाया गया। इसमें नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन शिक्षण केंद्रों के माध्यम से बिहार के वैश्विक बौद्धिक योगदान को रेखांकित किया गया। साथ ही संघर्ष, पलायन औरइनसे उबरने के काल खंडों को भी संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बिहार के नैतिक नेतृत्व को श्रद्धांजलि दी गई एवं सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में लोक परंपराओं और सामुदायिक जीवन की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। प्रस्तुति का समापन बिहार के एक ऐसे भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण के साथ हुआ जो अपनी विरासत में दृढ़ता से निहित रहते हुए स्वंय को निरंतर नवपरिभाषित कर रहा है।

स्वाति सिन्हा’ को कथक’ के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है
स्वाति सिन्हा’ को कथक’ के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। वह दूरदर्शन की ‘ए’ ग्रेड कलाकार हैं तथा उन्होंने भारत और विदेशों में कई प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंचों पर प्रदर्शन किया है। आईसीसीआर द्वारा प्रायोजित उनके अंतरराष्ट्रीय दौरों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य एशिया, अफ्रीका सहित विश्व के अन्य देशों के दर्शकों तक पहुंचा है, जिससे भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और सॉफ्ट पावर को बल मिला है। एक सफल कलाकार के साथ-साथ स्वाति सिन्हा अपने कला क्षेत्र के अलावा, सांस्कृतिक शिक्षा, कार्यशालाओं और जन-संपर्क कार्यक्रमों में भी सक्रिय रूप से शामिल रही हैं, जो कथक के ज्ञान को युवा पीढ़ियों तक पहुंचाने में एक महत्वपूर्ण योगदान है।

सांस्कृतिक संध्या का समापन बिहार की सुप्रसिद्ध लोक गायिका नीतू कुमारी नूतन द्वारा प्रस्तुत लोक संगीत कार्यक्रम के साथ हुआ
बिहार दौरे के दौरान, उनके नृत्य समूह के द्वारा 27 जनवरी को किलकारी बाल भवन, पटना में प्रात: 11 बजे से दोपहर एक बजे तक एक कार्यशाला आयोजित की जाएगी। संध्या 04:00 बजे बापू टावर में एक नृत्य प्रस्तुति आयोजित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, 28 जनवरी को विदेश मंत्रालय के अधीन नालंदा विश्वविद्यालय में संध्या 05:30 बजे एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। इस गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के माध्यम से ICCR क्षेत्रीय कार्यालय पटना ने बिहार के कलाकारों को प्रोत्साहित करने व संवाद, पहचान और राष्ट्रीय एकता के माध्यम के रूप में प्रदर्शन कलाओं के उपयोग के अपने दायित्व को फिर से सुनिश्चित किया। यह कार्यक्रम गणतंत्र के मूल्यों का एक सार्थक उत्सव सिद्ध हुआ, जिसमें बिहार की सांस्कृतिक विरासत और भारत के सामूहिक भविष्य में उसकी निरंतर बढ़ती भूमिका को प्रदर्शित किया गया। कथक प्रस्तुति के उपरांत लोक भवन बिहार के तत्वाधान में आयोजित सांस्कृतिक संध्या का समापन बिहार की सुप्रसिद्ध लोक गायिका नीतू कुमारी नूतन द्वारा प्रस्तुत लोक संगीत कार्यक्रम के साथ हुआ।
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