
Pakur: झारखंड को पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाली अंतरराज्यीय मालपहाड़ी सड़क पर स्थित 1C और 2C रेल फाटक आज आम जनता के लिए मौत के फाटक बनते जा रहे हैं। इन रेल फाटकों से हर दिन सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। लेकिन सुरक्षा के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं है। अब तक कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय निवासी विनोद मंडल ने बताया कि जब हम किसी को अस्पताल ले जाते हैं, तो सबसे पहले यही डर लगता है कि कहीं फाटक बंद ना मिल जाए। यहां किसी को अपनी जान जोखिम में डालनी ही पड़ती है। हाथ से खुलते गेट, न कोई चौकीदार, न अलार्म, नतीजा- हर वाहन इन पटरियों को किस्मत भरोसे पार करते हैं।
मरीजों की जान पर बन आती है
स्थानियों ने कहा कि पाकुड़ जिला पहले से ही स्वास्थ्य सेवा की कमी से जूझ रहा है। कई गंभीर मरीजों को इलाज के लिए अक्सर पश्चिम बंगाल के अस्पतालों में ले जाया जाता है और इसके लिए यही मालपहाड़ी सड़क ही जीवनरेखा बनती है। लेकिन अफसोस की बात है कि यह सड़क अब मौत का रास्ता भी बन चुकी है। जाम, रेल फाटक और अव्यवस्था के वजह से एंबुलेंस समय से मरीज को नहीं पहुंचा पाती। कई जिंदगियां बस इस इंतजार में चली जाती हैं कि गेट खुलेगा या नहीं।
ईस्टर्न जोनल रेलवे पैसेंजर्स एसोसिएशन (ईजेरप्पा) की जांच
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईस्टर्न जोनल रेलवे पैसेंजर्स एसोसिएशन (EZRPPA) हावड़ा मंडल के प्रतिनिधियों ने इन दोनों रेल फाटकों का निरीक्षण किया है। एसोसिएशन ने इसे एक गंभीर सुरक्षा संकट बताते हुए संबंधित रेलवे प्रशासन और राज्य सरकार से त्वरित समाधान की मांग की है।
स्थानीयों की मांगें:
- ऑटोमेटिक रेल फाटक या ओवरब्रिज/अंडरपास की व्यवस्था
- 24×7 गेटमैन और अलार्म सिस्टम की तैनाती
- आपातकालीन एंबुलेंस पासिंग लेन का निर्माण
- रेल प्रशासन और जिला प्रशासन के बीच समन्वय बैठक जल्द कराई जाए
रिपोर्टः संजय सिंह




