Patna- बिहार में सबसे अधिक नौ बार विधान सभा का चुनाव जीतने और 40 साल विधायकी और 20 साल मंत्री बने रहने का रिकॉर्ड रहने वाले रमई राम ने आज पटना के मेदांता में अपनी आखिरी सांस ली.
मुजफ्फरपुर का बोचहां विधान सभा उनका चुनाव क्षेत्र रहा, जहां वह विभिन्न दलों की ओर से वे जीत का परचम फहराते रहें. रमई राम ने अपने राजनीतिक पारी की शुरुआत वार्ड के चुनाव से की थी और राम संजीवन ठाकुर (स्वतंत्रता सेनानी) को पराजित किया था. 1972 के विधानसभा चुनाव में बोचहां (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़े और विजयी भी हुए. हालांकि, 1977 के चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार कमल पासवान से पराजित हो गये. इसके बाद 1980, 1985, 1990, 1995, 2000, 2005 के फरवरी व 2005 के अक्तूबर और 2010 के विधानसभा चुनाव में बोचहां विधानसभा से चुनाव लड़े और विजयी हुए
कई दलों से रहा उनका रिश्ता
रमई राम ने अपने लम्बे राजनीतिक जीवन में कई पार्टिया बदली. 1980 का चुनाव जनता पार्टी के टिकट पर लड़े और विजयी हुए. फिर 1985 में लोकदल, तो 1990 और 1995 में जनता दल से चुनाव लड़े. वर्ष 2000 और वर्ष 2005 के फरवरी व अक्तूबर के चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल से लड़े. 2010 में रमई राम ने जदयू का दामन थामा और जदयू के टिकट पर ही विधानसभा चुनाव लड़े और जीते.
राजद प्रत्याशी मुसाफिर पासवान से करना पड़ा था हार का सामना
2009 के लोकसभा चुनाव में रमई राम राजद के टिकट पर हाजीपुर से लड़ना चाह रहे थे, लेकिन राजद ने उन्हें टिकट नहीं दिया. वे कांग्रेस के टिकट पर गोपालगंज से लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन चुनाव जीत नहीं पाये .दूसरे दल से लोकसभा चुनाव लड़ने के कारण उन्हें विधानसभा से इस्तीफा देना पड़ा था. इस
कारण बोचहां विधानसभा सीट उस समय खाली हो गयी. 2009 के ही सितंबर माह में फिर से बोचहां विधानसभा का चुनाव हुआ जिसमें रमई राम जदयू के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन राजद प्रत्याशी मुसाफिर पासवान से वे चुनाव हार गये. लेकिन छह माह बाद हुए बिहार विधानसभा के चुनाव में वे मुसाफिर पासवान को हराकर फिर से बोचहां से चुनाव जीत गये.
2015 के विधानसभा चुनाव में रमई राम फिर राजद- जदयू गठबंधन प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े. इधर, एनडीए से लोजपा ने बेबी कुमारी को लड़ाने का फैसला किया,लेकिन अंतिम क्षण में लोजपा ने बेबी कुमारी को दरकिनार कर अनिल साधु को अपना उम्मीदवार बना दिया. बेबी कुमारी भी निर्दलीय चुनाव मैदान में कूद पड़ीं. इस चुनाव में बेबी कुमारी ने रमई राम को हरा दिया.
न्यायपालिका में आरक्षण का मुद्दा उठाने वाले पहले राजनेता थें
रमई राम ने न्यायपालिका में आरक्षण लागू किये जाने का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया था. 1995 से वर्ष 2000 तक मुजफ्फरपुर व पटना से लेकर दिल्ली तक इसको लेकर आवाज उठाई थी. दिल्ली जंतर-मंतर पर धरना- प्रर्दशन भी किया था.
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