Power Boosting : मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल को दी दिल्ली के एलजी जैसी पावर, उमर अब्दुल्ला ने दागा सवाल

डिजीटल डेस्क : Power Boostingमोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल को दी दिल्ली के एलजी जैसी पावर, उमर अब्दुल्ला ने दागा सवाल। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने लगातार दूसरे दिन बड़ा फैसला लेते हुए नई अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत जम्मू-कश्मीर में अब उपराज्यपाल की शक्तियां और ज्यादा बढ़ाते हुए उन्हें दिल्ली के उपराज्यपाल जैसी शक्तियां दी गई हैं। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शनिवार को जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में संशोधन किया है। इसके बाद अब जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल दिल्ली के एलजी की तरह अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग जैसे फैसले कर पाएंगे। जम्मू कश्मीर में इसी साल चंद माह में विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे ऐन पहले केंद्र सरकार के फैसले पर स्थानीय सियासी दलों ने विरोध जताया है। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस पर तीव्र आपत्ति जताते हुए सवाल दागे हैं।

इस फैसले से जम्मू कश्मीर के उपराज्यल को मिले अनेकों अहम अधिकार

शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय के फैसले के ऐलान के बाद अब जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल की प्रशासनिक भूमिका का दायरा काफी बढ़ गया है। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में संशोधन के बाद उपराज्यपाल को अब पुलिस, कानून व्यवस्था, एआईएस से जुड़े मामलों में ज्यादा अधिकार होंगे। पहले, एआईएस से जुड़े मामलों (जिनमें वित्त विभाग की सहमति जरूरी होती थी) और उनके तबादलों और नियुक्तियों के लिए वित्त विभाग की मंजूरी जरूरी थी लेकिन अब उपराज्यपाल को इन मामलों में भी ज्यादा अधिकार मिल गए हैं। इसके अलावा अब महाधिवक्ता, कानून अधिकारियों की नियुक्ति और मुकदमा चलाने की अनुमति देने या इनकार करने या अपील दायर करने से संबंधित प्रस्ताव पहले उपराज्यपाल के सामने रखे जाएंगे। गृह मंत्रालय ने जो जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 55 के तहत संशोधित नियमों को अधिसूचित किया है, उसमें उपराज्यपाल की भूमिका को परिभाषित करने वाले नए खंड जोड़े गए हैं। अधिसूचना में कहा गया है कि कानून के तहत उपराज्यपाल के विवेक का इस्तेमाल करने के लिए पुलिस, कानून व्यवस्था, एआईएस और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी ) से संबंधित किसी भी प्रस्ताव को वित्त विभाग की पूर्व सहमति की आवश्यकता नहीं होगी, बशर्ते कि प्रस्ताव को मुख्य सचिव के माध्यम से उपराज्यपाल के समक्ष रखा गया हो।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव की घोषणा जल्द होने की संभावना

इस समय पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा अगस्त 2020 से जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल हैं। 5 अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत दिए गए जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म कर दिया गया था और पूर्व राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया था। उसमें से लद्दाख में विधानसभा नहीं है। जून 2018 से जम्मू और कश्मीर केंद्र सरकार के शासन के अधीन है। सरकार ने कहा है कि विधानसभा चुनाव होने के बाद राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 30 सितंबर 2024 से पहले जम्मू और कश्मीर विधानसभा के लिए चुनाव कराने का आदेश दिया है। इसी क्रम में अगले एक-दो माह में केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने की अधिसूचना जारी करने की तैयारी के संकेत हैं। चुनाव आयोग जम्मू कश्मीर में पहले ही अपने चुनावी तैयारी के होमवर्क में जुटा हुआ है जिसके बारे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा चुनाव के दौरान सार्वजनिक तौर पर बयान भी दे चुके हैं।

नेशनल कांफ्रेंस नेता उमर अबदुल्ला
नेशनल कांफ्रेंस नेता उमर अबदुल्ला

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में मोदी सरकार ने ये किए हैं संशोधन

मोदी सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में किए गए नए संशोधन के बाद पुलिस, पब्लिक ऑर्डर, ऑल इंडिया सर्विस और एंटी करप्शन ब्यूरो से रिलेटेड प्रस्तावों पर वित्त विभाग की सहमति के बिना फैसला लेने का अधिकार उपराज्यपाल के पास रहेगा। इसी क्रम में अधिनियम में नई धाराएं शामिल की गई हैं। इसके 42 ए के तहत डिपार्टमेंट ऑफ लॉ, जस्टिस एंड पार्लियामेंट्री अफेयर्स विभागों में वकील-एडवोकेट जनरल और अन्य अधिकारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मुख्य सचिव और सीएम के जरिए उपराज्यपाल के समक्ष पेश किया जाएगा। साथ ही धारा 42 बी -अभियोजन स्वीकृति देने या अस्वीकार करने या अपील दायर करने के संबंध में कोई भी प्रस्ताव विधि विभाग द्वारा मुख्य सचिव के माध्यम से उपराज्यपाल के समक्ष रखा जाएगा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने मोदी सरकार के फैसले पर जताया ऐतराज

केंद्र की मोदी सरकार के इस फैसले पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाया है। जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल को अधिक शक्तियां देने पर उन्होंने कहा है कि अब छोटी से छोटी नियुक्ति के लिए भीख मांगनी पड़ेगी जो कि स्थानीय सियासतदानों की गरिमा के खिलाफ है। इसे कत्तई नहीं स्वीकारा जा सकता। इसका पुरजोर विरोध होगा। उमर ने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर को रबर स्टांप मुख्यमंत्री नहीं चाहिए जैसा कि दिल्ली में ऐसे नियमों के लागू के चलते हालात देखने को मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग बेहतर सीएम के हकदार हैं।

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