Ranchi : राज्यपाल से भोजपुरी मगही मैथिली अंगिका मंच के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात…

Ranchi : आज राजद महासचिव सह अखिल भारतीय भोजपुरी मगही मैथिली अंगिका मंच के अध्यक्ष कैलाश यादव के नेतृत्व में 6 सदस्यों का प्रमुख प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल संतोष गंगवार से राजभवन में मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपते हुए भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका, भूमिज भाषा को नियोजन नीति में क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल करने की मांग की और विस्तारपूर्वक वार्ता कर अवगत कराया गया।

यादव ने राज्यपाल महोदय को कहा कि महामहिम मंच की ओर से आपका ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहना है कि, झारखंड राज्य पूर्ववर्ती बिहार राज्य से बना एक ऐसा राज्य है जहाँ सभी जाति धर्म एवं भाषा के लोग एक साथ मिलकर राज्य के उत्तरोत्तर विकास में निरंतर लगे हुए हैं।

Ranchi : मगही, मैथिली समेत इन भाषाओं को क्षेत्रीय भाषाओं में शामिल करने की मांग

झारखण्ड राज्य के विशिष्ट क्षेत्रों में कतिपय राजकीय प्रयोजनार्थ उर्दू, संथाली, बंगला, मुंडारी, हो, खरिया, कुडूख (उरांव ) कुरमाली, खोरठा, नागपुरी, पंचपरगनिया तथा उड़िया भाषा के अतिरिक्त भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगीका, एवं भूमिज भाषा को राज्य के द्वितीय राजभाषा कि मान्यता हेतु अधिसूचना 29 अगस्त 2018 को निर्गत है।

झारखण्ड सरकार कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राज्यभाषा विभाग के अधिसूचना संख्या 1426 दिनांक 10. 03.2023 द्वारा निर्गत झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा संचालन नियमावली 2023 में उक्त 17 द्वितीय राज्यभाषाओं से 12 को क्षेत्रीय भाषा के रूप मान्यता दी गई है जबकि भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगीका एवं भूमिज को वंचित रखा गया है।

विदित हो कि पलामू एवं संथाल परगना प्रमंडल सहित राज्य के मुख्य शहर राँची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो गोड्डा, देवघर गिरिडीह, कोडरमा एवं चतरा में करोड़ों लोग इन भाषाओं को बोलते हैं, इन भाषाओं की साहित्य भी एक अमूल्य धरोहर है।

झारखण्ड सरकार कार्मिक, प्रशाशनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के अधिसूचना संख्या 453दिनांक 18.02.2022 में जिलावार चिन्हित क्षेत्रीय भाषाओ में भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगीका एवं भूमिज के अतिरिक्त सभी भाषाओं को सम्मिलित किया गया है ।

राज्यपाल महोदय से निवेदन पुर्वक आग्रह किया गया कि राज्य के मान्यता प्राप्त द्वितीय राज्यभाषा में शामिल सभी 17 भाषाओं को उचित सम्मान एवं प्रोत्साहन देते हुए भोजपुरी, मगही,मैथिली, अंगीका एवं भूमिज को भी राज्य नियोजन नीति में क्षेत्रीय भाषा के रूप में न्यायसंगत समाहित करने के लिए राज्य सरकार व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अनुशंसा कर अवगत कराने की कृपा करें।

वार्ता के उपरांत राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि मैं इस विषय पर सरकार को पत्र लिखूंगा और इसे गंभीरता से अध्ययन करने का जिक्र करूंगा। राज्यपाल ने कहा इस विषय पर आप सभी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मुलाकात कर वार्ता कीजिए व अवगत कराएं।

प्रतिनिधिमंडल में कैलाश यादव के अलावा अमरनाथ झा सुधीर गोप सुरेन्द्र मिश्रा राधेश्याम यादव सुनील पांडेय मौजूद थे।

मदन सिंह की रिपोर्ट–

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