Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट की एक महिला जज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें उन्होंने बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी (Child Care Leave – CCL) नहीं दिए जाने को चुनौती दी है। याचिकाकर्ता एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज (ए़डीज) श्वेता सिन्हा ने कहा है कि उन्होंने बच्चे की देखभाल के लिए अवकाश की मांग की थी, जिसे राज्य सरकार द्वारा बिना कारण बताए अस्वीकृत कर दिया। यह मामला महिला अधिकारों, न्यायपालिका में कार्यस्थल की नीतियों और लिंग समानता पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे रहा है।
ए़डीज श्वेता सिन्हा का कहना है कि केंद्रीय सेवाओं में महिला अधिकारियों को यह अधिकार प्राप्त है और राज्य न्यायिक सेवाओं में कार्यरत महिलाओं को भी यह सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने अनुरोध किया है कि महिला न्यायिक अधिकारियों को Child Care Leave – CCL का अधिकार दिया जाए और इसे नीति के तहत स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए।

Ranchi : यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ के समक्ष लाया गया है। उन्होंने 29 मई को सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की। ए़डीज श्वेता सिन्हा की ओर से पेश होने वाले वकील ने मामले की सुनवाई जल्द करने का आग्रह किया था। उन्होंने बताया कि ए़डीज सिंगल पेरेंट है।
चाइल्ड केयर लीव (CCL) एक विशेष प्रकार की छुट्टी है जो सरकार द्वारा महिला कर्मचारियों (और कुछ मामलों में पुरुष कर्मचारियों) को उनके बच्चों की देखभाल के लिए दी जाती है। इसका उद्देश्य कार्यरत माता-पिता, विशेषकर माताओं, को बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, और अन्य आवश्यकताओं के लिए समय देना है।







