RTE Recognition Row: झारखंड के Private Schools को मान्यता शर्तों पर हाईकोर्ट की रोक, शिक्षा अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप

झारखंड हाईकोर्ट ने RTE के तहत निजी स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया पर रोक लगा दी। शिक्षा अधिकारियों द्वारा परेशान करने की शिकायत पर कोर्ट ने हस्तक्षेप किया।


RTE Recognition Row रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य के निजी स्कूलों की आरटीई के तहत मान्यता प्रक्रिया से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया। अदालत ने साफ कहा कि फिलहाल स्कूलों को परेशान न किया जाए और अगले आदेश तक मान्यता प्रक्रिया पर रोक बरकरार रहेगी। यह रोक वर्ष 2019 के बाद स्थापित निजी स्कूलों पर भी लागू मानी जाएगी, जिससे बड़ी संख्या में संस्थानों को राहत मिली है।

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अदालत में यह मुद्दा निजी स्कूलों के कई संगठनों की ओर से उठाया गया था। प्रार्थी पब्लिक स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष आलोक कुमार दुबे, झारखंड प्राइवेट स्कूल ट्रस्ट हजारीबाग और प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने अलग-अलग सिविल रिव्यू याचिकाएं दायर कर 2 मई 2025 के आदेश पर पुनर्विचार की मांग की थी।

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सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया, भानु कुमार और भारती वी. कौशल ने दलीलें रखीं। उनका कहना था कि आरटीई 2009 के तहत 2019 में बने नियमों को लागू करने के नाम पर शिक्षा विभाग के अधिकारी निजी स्कूलों को अनावश्यक रूप से परेशान कर रहे हैं। वकीलों ने आग्रह किया कि इस प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए ताकि स्कूलों को राहत मिल सके।


Key Highlights :

  • झारखंड हाईकोर्ट ने आरटीई के तहत निजी स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया पर अगले आदेश तक रोक लगाई।

  • यह रोक 2019 के बाद स्थापित सभी निजी स्कूलों पर भी लागू मानी जाएगी।

  • प्रार्थियों का आरोप कि शिक्षा विभाग के अधिकारी मान्यता मुद्दे पर स्कूलों को अनावश्यक परेशान कर रहे हैं।

  • हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने तक किसी भी स्कूल पर दबाव न डाला जाये।

  • कई निजी स्कूल संगठनों ने 2 मई 2025 के आदेश को चुनौती देते हुए रिव्यू याचिकाएं दायर की हैं।

  • सुनवाई चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने की।


खंडपीठ के समक्ष यह भी तर्क दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट में संबंधित मामले की सुनवाई लंबित है, इसलिए अंतिम निर्णय आने तक राज्य सरकार को कठोर कार्रवाई या दबाव बनाने से रोका जाए। अदालत ने इस मांग को स्वीकार किया और कहा कि शीर्ष अदालत के फैसले तक किसी भी स्कूल को मान्यता संबंधी प्रक्रिया में प्रताड़ित नहीं किया जाएगा।

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चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अगली सुनवाई तक के लिए अंतरिम राहत दी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 2019 के बाद संचालित होने वाले स्कूल इस आदेश की सीमा में आएंगे, जिससे राज्य के अनेक नए निजी स्कूलों को महत्वपूर्ण राहत मिली है।

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