धनबाद: झारखंड के कोयला क्षेत्र के सबसे बड़े शहर धनबाद में कोयला ढुलाई करने वाले ट्रक मालिकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है, जिससे कोयला आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ट्रक मालिकों का आरोप है कि उनकी भाड़े की दरों में वृद्धि की मांग लंबे समय से लंबित पड़ी है, और जब तक यह मांग पूरी नहीं की जाती, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे। इस हड़ताल का सबसे ज्यादा प्रभाव ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) की कोयला आपूर्ति पर पड़ा है।
कोयला उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, धनबाद जिले में लगभग 500 से अधिक ट्रक मालिकों ने इस हड़ताल में भाग लिया है, और इससे कोयला की सप्लाई चेन में गंभीर रुकावटें आ रही हैं। ईसीएल और बीसीसीएल दोनों ही प्रमुख कोल कंपनियां हैं जो भारतीय उद्योगों के लिए कोयला की आपूर्ति करती हैं। ट्रक मालिकों का कहना है कि उनके भाड़े की दरें जो पहले से बहुत कम थीं, बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि वे अपने खर्चों को पूरा कर सकें।
वर्तमान में, कोल ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि डीजल की कीमतों में वृद्धि, वाहनों की मरम्मत की बढ़ती लागत और अन्य महंगाई के कारण उनका काम करना मुश्किल हो गया है। इस समस्या को लेकर उन्होंने कई बार अधिकारियों से बातचीत की, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके कारण उन्होंने हड़ताल का रास्ता अपनाया।
कोल उद्योग की चिंता
कोयला उद्योग से जुड़े प्रमुख संगठनों ने इस हड़ताल को लेकर चिंता जताई है। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि हड़ताल जारी रहती है, तो यह न केवल ईसीएल और बीसीसीएल के संचालन को प्रभावित करेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कोयला आपूर्ति की स्थिति भी बिगड़ सकती है। उनके अनुसार, कोयला उत्पादन में रुकावट का असर स्टील, बिजली और अन्य उद्योगों पर भी पड़ेगा, जो कोयला पर निर्भर करते हैं।
एक प्रमुख उद्योग संगठन के अधिकारी ने कहा, “कोल ट्रांसपोर्टर्स की मांगों को अनदेखा करना अब मुश्किल हो गया है। सरकार को जल्द से जल्द एक समाधान निकालने की जरूरत है, ताकि इस समस्या का हल निकाला जा सके और उद्योगों को लगातार कोयला आपूर्ति मिल सके।”
सरकार से समाधान की अपील
कोल ट्रांसपोर्टर्स के नेता ने कहा कि वे सरकार से सकारात्मक और त्वरित प्रतिक्रिया की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार उनकी भाड़े की दरों में वृद्धि की मांग को मान लेती है, तो वे हड़ताल वापस लेने को तैयार हैं और काम पर लौटने के लिए तैयार होंगे।
राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस विवाद को सुलझाने के लिए सरकार और उद्योग के बीच वार्ता शुरू होगी।
इस बीच, कोल खदानों और कोल डिपो में काम बंद होने के कारण स्थानीय बाजारों में कोयला की कमी देखने को मिल रही है, और कई क्षेत्रों में कोयला की भारी किल्लत हो सकती है।







