धनबाद : सीएसआईआर-केन्द्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान, सिम्फर धनबाद के प्लैटिनम जयंती समापन समारोह में बुधवार को झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने CSIR -CIMFR सभागार में कहा कि पहले मंत्र का जमाना था, आज यंत्र का जमाना है. हमारे अविष्कार को पेटेंड बहुत मुश्किल से मिल पाता है. पोटाश 100 प्रतिशत आयात होता है, उसका रॉ मेटेरियल हमारे पास है, बस उसका सही से टेक्नोलॉजी के साथ इस्तेमाल करने की कोशिश करनी होगी. हमे हर हाल में स्वदेशी को अपनाना होगा.
सिम्फ़र में हो रहे है बेहतर रिसर्च
राज्यपाल ने कहा कि सिम्फ़र बेहतर रिसर्च कर रहा है. एक समय नालंदा विश्वविद्यालय में विश्व भर से लोग यहां पढ़ने आते थे. आज हम अपने बच्चों के विदेश में पढ़ने पर गर्व करते है. अपने देश के प्रति भावना जागृत करने की आवश्यकता है. पानी से हाइड्रोजन बन जाये तो हम कई मामलों में आत्मनिर्भर बन सकते है. हमे देश प्रेम की भावना के साथ आगे बढ़ना होगा. हमे अपनी मातृभाषा के साथ काम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.
प्रति वर्ष 1000 करोड़ की मिलने लगी है रॉयल्टी
संस्थान के निदेशक डॉ पी के सिंह ने कहा कि देश की जरुरत के मुताबिक हम काम कर रहे है, चाहे सेना के लिए सड़क बनानी हो या अंडरग्राउंड खदान, हम जरूरतों को पूरा करने की लगातार कोशिश कर रहे है और आगे भी करते रहेंगे. नतीजा है कि आज संस्थान को प्रति साल 1000 करोड़ की रॉयल्टी मिल रही है. इसमें से 300 करोड़ केंद्र सरकार को देकर देश के विकास में भी हाथ बटा रहे है. आपको बता दे कि देश का ये वहीँ प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थान है जिसके पांच वैज्ञानिकों को दुनिया के 2 फ़ीसदी श्रेष्ठ वैज्ञानिकों में शामिल किया गया है. जिसमे इस संस्थान के निदेशक डॉ पीके सिंह भी शामिल हैं.
इस मौके पर राज्यपाल ने सीएसआईआर-सीआईएमएआर प्रौद्योगिकी और जानकारी के संग्रह नामक स्मारिका और सीएसआईआर-सीआईएमएआर राष्ट्रीय परीक्षण सुविधाएं और प्रमाणन संग्रह” नामक पुस्तक का अनावरण किया और पोटाश बनाने के लिए निर्मित पायलट प्लांट का उद्घाटन वर्चुअल मोड में किया.
रिपोर्ट : राजकुमार जयसवाल
हमारे चेहरे की मुस्कान बता रही राज्यपाल से क्या बात हुई-कहकशां कमाल
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