भागलपुर : बिहार में अब बड़े पैमाने पर जैविक सिंदूर की खेती होगी। इसके लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) सबौर ने पहल की है। सिंदूर के 200 पौधे बीएयू ने लगाए हैं। बिक्सा ओरेलाना लगाए गए हैं, जिसे लिपस्टिक ट्री भी कहते हैं। इसके साथ ही इस सिंदूर को खाने के रंग में भी प्रयोग किया जा सकता है।

बाजारों में अमूमन केमिकल युक्त सिंदूर मिलने लगे हैं
आपको बता दें कि बाजारों में अमूमन केमिकल युक्त सिंदूर मिलने लगे हैं। जिससे महिलाओं को खतरा बताया ज रहा है। ऐसे में बीएयू ने पहले मधुबनी इलाके में इसकी खेती शुरू की थी। अब बीएयू परिसर में जैविक विधि से सिंदूर का उत्पादन होगा। हाल ही में 200 पौधे लगाए गए जो अब विकसित हो रहे हैं। दो से तीन साल में इन पौधों में फलन भी होगा, जिससे सिंदूर तैयार होगा। इसके बाद इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए बीएयू किसानों को प्रेरित करेगा। साथ ही ट्रेनिंग भी दी जाएगी। बीएयू ने सबसे पहले जिन पौधों को प्राकृतिक तरीके से जैविक विधि से लगाया था। उसमें से सिंदूर का जब उत्पादन हुआ तो वह सिंदूर अन्य सिंदूरो से अलग लगा। प्राकृतिक सुगंध ने ध्यान आकर्षित किया, उसमें कई औषधीय गुण पाए जाएंगे।
BAU के कुलपति डॉ. डीआर सिंह अनवरत प्रयास कर रहे हैं
इसको बढ़ावा देने के लिए अब बीएयू के कुलपति डॉक्टर डीआर सिंह अनवरत प्रयास कर रहे हैं। इतना ही नहीं कुलपति प्रयास कर रहे हैं कि जितनी जल्द हो कई गांव में जैविक सिंदूर की प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जाए जिससे महिलाओं को रोजगार के साथ-साथ नारी सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह सिंदूर न केवल पारंपरिक प्रयोग के लिए उपयोगी है। बल्कि इसमें त्वचा रोग आंखों के संक्रमण कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में लाभकारी साबित होगा।
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राजीव रंजन की रिपोर्ट
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