जनजातीय विश्वविद्यालय विधेयक विधानसभा से पारित …

रांची: झारखंड के शीतकालीन सत्र के दौरान पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय विधेयक सदन से पास किया गया है. उच्च तकनीकी, शिक्षा और कौशल विभाग के प्रभारी मंत्री मिथलेश ठाकुर ने सदन में विधेयक पास किया था. इस मामले में तीन विधायकों ने विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग की. सभी ने कहा कि समिति 30 दिनों के अंदर अपना प्रतिवेदन दे.

प्रवर समिति में भेजने की मांग करने वालों में माले विधायक विनोद कुमार सिंह, आजसू विधायक लंबोदर महतो, बीजेपी विधायक अनंत ओझा शामिल हैं.

कांग्रेस विधायक बंधु तिर्की ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया है. लेकिन इस विधेयक में कई तरह की त्रुटियां है. आदिवासी समाज के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल है, पास करने से पहले इसे प्रवर समिति को भेजे और जनजातीय विशेषज्ञ से इस पर राय ली जाए.

कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने भी इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग की. उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी जनजाति विश्वविद्यालय अमरकंटक में बने हुए विश्वविद्यालय के पहले अध्ययन किया जाए. झारखंड में बनने वाले जनजाति विश्वविद्यालय में कई ऐसे अनछुए पहलु हैं, जिसे शामिल किए जाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजाति विश्वविद्यालय में फिजिक्स, मैथ, केमिस्ट्री विषय को शामिल किए जाने की आवश्यकता है. इसलिए इसे प्रवर समिति को भेजा जाए.

प्रभारी मंत्री मिथलेश ठाकुर ने कहा, जनजाति विश्वविद्यालय में सभी पहलुओं को शामिल किया गया है. ऐसे ही इस विधेयक को प्रवर समिति को भेजे जाने का कोई औचित्य नहीं है.

बता दें कि कुछ माह पहले हुए जनजातीय सलाहकार परिषद (टीएसी) की बैठक में आदिवासियों को लेकर कई बड़े फैसले लिये गये थे. इसमें सबसे बड़ा फैसला यह था कि झारखंड सरकार राज्य में जनजातीय विश्वविद्यालय खोलेगी. बैठक में फैसला हुआ था कि सरकार इस संबंध में विधेयक लाकर विश्वविद्यालय निर्माण की प्रक्रिया शुरू करेगी.

झारखंड में खुलने वाला पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय पूर्वी भारत का पहला विश्वविद्यालय होगा. इसे जमशेदपुर के गालूडीह और घाटशिला के बीच इस विश्वविद्यालय के निर्माण की योजना है. इसके लिए 20 एकड़ जमीन भी चिह्नित की जा चुकी है.

टीएससी की बैठक में सीएम हेमंत सोरेन ने भी कहा था कि राज्य के पहले जनजातीय विश्वविद्यालय के निर्माण का उद्देश्य जनजातीय भाषा और आदिवासी समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को सहेजना है. साथ ही उन पर शोध करने तथा आदिवासी समाज के मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना है.

रिपोर्ट- मदन 

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