योग से बदला जीवन, गांव की बेटियों की पहल से आई स्वास्थ्य क्रांति

पटना : पंचायती राज विभाग की ओर से पंचायतों में स्थानीय सतत विकास लक्ष्य (LSDG) के तहत महिला हितैषी थीम पर काम किया जा रहा है। इसके सफल नतीजे धरातल पर दिखने लगे हैं। बिहार के लखीसराय जिले के नोनगढ़ पंचायत में एक प्रेरणादायक कहानी गूंज रही है। यहां स्कूल-कॉलेज की युवा लड़कियां गांव वालों को स्वस्थ समाज का संदेश दे रही हैं। महज 17-18 साल की उम्र की छात्राएं रोजाना सुबह दो घंटे(5 से 7 बजे) मुफ्त एडवांस योगा की ट्रेनिंग दे रही हैं। इस मुहिम में राजनंदिनी कुमारी(18 वर्ष), अंजू कुमारी (17 वर्ष), सिमरन कुमारी (17वर्ष) और अनु कुमारी (17 वर्ष) शामिल हैं। ये चारों लड़कियां नोनगढ़ के हीं कॉलेज में पढ़ती हैं और सुबह-सुबह पंचायत के कॉलेज मैदान में गांव वालों को योगासन सिखाती हैं। इनके प्रभावी प्रयास से रोजाना करीब 100 लोग इन सत्रों में शामिल होते हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों की भागीदारी सबसे अधिक है।

योग से जुड़कर उभर रहीं नई रोल मॉडल

पंचायत की मुखिया जुली देवी बताती हैं पंचायत में महिलाओं के उत्थान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहें हैं। यहां लड़कियों को पढ़ाई के साथ स्वस्थ जीवन के लिए खेलकूद और योगा की से भी जोड़ा गया है। इस माहौल ने इन्हें प्रेरित किया। अब ये न सिर्फ गांव में योगा सत्र करा रहीं हैं, बल्कि कई राज्य और राष्ट्रीय स्तर की योगा प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपना लोहा मनवा चुकी हैं। इन्हें उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मान भी मिल चुके हैं।

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जब गांव की बेटियों ने संभाली सेहत की कमान

उन्होंने आगे बताया कि इन सत्रों का सबसे बड़ा असर महिलाओं पर पड़ा है। वे अब अपने स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा जागरूक हो गई हैं। सुबह योगा करने के बाद महिलाएं अपने घरेलू कामकाज में उत्साह से लग जाती हैं। इनके लिए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच शिविर, जागरूकता अभियान और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। महीने में एक बार प्रोफेशनल योगा ट्रेनर भी गांव आकर लोगों को विशेष प्रशिक्षण और प्रेरणा देते हैं।

योग महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनकी भावनात्मक और मानसिक सेहत को भी मजबूत बनाए रखता है – आचार्य आदर्श मिश्रा

बोधगया स्तिथ श्री श्री गुरुकुल के आचार्य आदर्श मिश्रा कहते हैं कि योग महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनकी भावनात्मक और मानसिक सेहत को भी मजबूत बनाए रखता है। यह आत्मविश्वास बढ़ाने में भी बहुत सहायक होता है। वे सलाह देते हैं कि यदि महिलाएं प्रतिदिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में सूर्य नमस्कार का अभ्यास करें, तो उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।

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