- ग्रामीण संवेदक संघ ने मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचाने और कार्रवाई की मांग की
रिपोर्टः संतोष वर्मा/ न्यूज 22स्कोप
चाईबासा: ग्रामीण संवेदक संघ के अध्यक्ष सुनिल सिरका के द्वारा सदस्यों के साथ राज्य के कैबिनेट मंत्री मिथिलेश ठाकुर से मुलाकात की. इस बीच डीडीसी संदीप बक्शी के फर्जी आदिवासी के नाम पर नौकरी करने का विरोध जताया है. सिरका ने मिथलेश ठाकुर को बताया कि 6 साल से कास्ट स्क्रुटनी कमिटी के द्वारा उच्च न्यायालय में रिपोर्ट क्यों नहीं दाखिल किया गया है, कमिटी लगातार कोर्ट के आदेश का अवहेलना कर रही है. सिरका बीते दिनों भी विषेश प्रमंडल के कैशियर बीटी सिंह को एसीबी के द्वारा पकड़े जाने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला में कमिशन वसुली को बढ़ावा देने के मामला में फर्जी आदिवासी, डीडीसी को दोषी ठहरा चुके हैं. उन्होंने डीडीसी संदीप बक्शी के मामला को सरकार से एसटी होने या नहीं होने को क्लियर करने की मांग किए हैं.
डीडीसी के एसटी कोटा में नौकरी कर रहे लोगों की कर चुके है शिकायत
सुनिल सिरका ने मंत्री को तीन साल में जिन लोगों ने डीडीसी के एसटी कोटा में नौकरी करने को लेकर शिकायत की है, उन सभी के पत्र की छाया प्रति सौंपी गई है. विदित हो कि इस मामला में मानकी मुंडा संघ, हो आदिवासी महा सभा, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष विपीन पूर्ति, पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा, जदयू अध्यक्ष विश्राम मुंडा, आजसू पार्टी के जिला अध्यक्ष रामलाल मुंडा, जेएमएम के जिला सचिव सोना राम देव गम, झारखंड भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के अध्यक्ष गणेश प्रसाद ने राज्य के मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर एसटी का दर्जा को रद्द करने की मांग कर चुके हैं.
कास्ट स्क्रुटनी कमिटी रिपोर्ट दाखिल करने में कर रही आनाकानी
डीडीसी संदीप बक्शी के केस में पक्ष कार के रूप में याचिका दायर करने वाले नूरी कुंकल की मौत का रहस्य से पर्दा उठाना जरूरी है. किसके दबाव में नूरी कुंकल केस वापस लिया था, यह भी जांच का विषय है. यह भी मालूम हो कि डीडीसी के एसटी मामला में उच्च न्यायालय में चल रहे केस में नूरी कुंकल ने कोर्ट के आदेश की औवहेलना किए जाने को लेकर याचिका दायर किए थे, जिसपर कोर्ट ने संज्ञान लिया और 6 हफ्ते में कास्ट स्क्रुटनी कमिटी से रिपोर्ट की मांग की, लेकिन डीडीसी संदीप बक्शी अपनी ऊंची पहुंच पैरवी से आज तक रिपोर्ट कोर्ट में नही दाखिल होने दिया.
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