Advertisment

 ड्रेस सिलाई से 225 करोड़ रूपये के टर्न ओवर का लक्ष्य,जीविका दीदी तेजी से पेश कर रहीं सशक्तिकरण की एक नई मिसाल

 ड्रेस सिलाई से 225 करोड़ रूपये के टर्न ओवर का लक्ष्य,जीविका दीदी तेजी से पेश कर रहीं सशक्तिकरण की एक नई मिसाल

पटना : जीविका दीदियां अब आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों का भविष्य संवारने में जुट गई हैं। वह इन बच्चों को गुणवत्तापूर्ण व एकरूप पोशाक उपलब्ध कराकर अपने हाथों के हुनर को निखारने में जुटी हैं। इससे शून्य से छह वर्ष उम्र के बच्चों को न सिर्फ आकर्षक पोशाक उपलब्ध हो रहा है बल्कि समूह की दीदियों के लिए सम्मानजनक आजीविका का जरिया भी तैयार हो चुका है।

बच्चों के पोशाक से जीविका दीदियां करेंगी 225 करोड़ रुपए टर्न ओवर का लक्ष्य

बच्चों के ड्रेस की सिलाई से समूह की दीदियों के लिए 225 करोड़ रुपए टर्न ओवर का लक्ष्य निर्धारित है, जिसे आने वाले समय में पूरा किया जाएगा। समूहों की जीविका दीदियां आंगनबाड़ी केंद्रों में प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों के लिए भविष्य तराशने की एक नई मिसाल साबित हो रही हैं। उनके हाथों तैयार आकर्षक ड्रेस बच्चों की खूबसूरती को निखारने का काम कर रहा है। योजना की सफलता को देखते हुए सरकार भविष्य में सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए भी ड्रेस जीविका दीदियों से सिलवाने का निर्णय लिया है।

स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों को ड्रेस उपलब्ध करायेंगी जीविका दीदियां

वर्ष 2022 में शुरू जीविका दीदी की सिलाई घर के लिए 15 जिलों में 25 आधुनिक सिलाई सह उत्पादन केंद्र एवं प्रखंड स्तरीय 1050 सिलाई केंद्र स्थापित हैं। इन सिलाई केंद्रों पर सेवा देने के लिए 45 हजार 945 दीदियों को प्रशिक्षित किया गया। इनमें से 23 हजार 535 दीदियों ने ड्रेस सिलाई का काम शुरू भी कर दिया है। जीविका दीदियों ने बच्चों के ड्रेस सिलाई का जो मुहिम छेड़ा है, उसके तहत आने वाले समय में एक लाख 13 हजार 971 स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों का ड्रेस उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है। एक अनुमान के अनुसार राज्य के सभी प्रमंडलों में करीब 50 लाख बच्चों को ड्रेस तैयार कर उन्हें प्रति वर्ष दो सेट के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा।

समूहों के नोडल अधिकारियों का मानना है कि एक जीविका दीदी प्रति दिन औसतन 8-10 ड्रेस की सिलाई कर ले रही हैं। इनकी सहूलियत में कलस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) स्तर पर 15-20 और केंद्रीय प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्रों पर 60-70 सिलाई मशीन की सुविधा दी गई है। यहां प्रशिक्षित दीदियां सुबह 10 से शाम छह बजे के बीच बच्चों के ड्रेस की सिलाई कर अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही हैं।

पोशाक सिलाई में जीविका की सहभागिता से होगा बड़ा आर्थिक बदलाव

बिहार में आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए यूनिफॉर्म (ड्रेस) की सिलाई का जिम्मा जीविका दीदियों को सौंपा गया है। राज्य में यह एक बड़ा आर्थिक बदलाव है। जीविका दीदियों के हाथों बच्चों का ड्रेस तैयार किए जाने से बड़े पैमाने पर टर्नओवर और रोजगार सृजन की संभावना बन रही है। आने वाले दिनों में इसे सरकारी स्कूलों में भी लागू किया जाएगा।

ये भी पढ़े  :  सरकार का निश्चय ‘मजबूत आधार – आधुनिक विस्तार’, प्रगति के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा बिहार

Gumla Fake GK Drawing Competition: नगर परिषद के नाम पर GK-Drawing...

Gumla Fake GK Drawing Competition: गुमला नगर परिषद के नाम पर कथित तौर पर आयोजित "GK/ड्राइंग ओलंपियाड प्रतियोगिता-2026" को लेकर विवाद खड़ा हो गया...

Jharkhand IFMS Bank PAN Verification: सरकारी भुगतान में फर्जीवाड़ा रोकने की...

Jharkhand IFMS Bank PAN Verification: राज्य के खजाने से धोखाधड़ी करके पैसे निकालने से रोकने के लिए, झारखंड के वित्त विभाग ने 'इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल...

JPSC JSSC Student Protest: छात्र आंदोलन के बीच सरकार का बड़ा...

JPSC JSSC Student Protest: झारखंड में JPSC और JSSC के खिलाफ चल रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने...