रांची: ऐसे केस जिसमें बेहद मामूली सजा का प्रावधान है,वे भी वर्षों तक चल रहें है। ऐसे केस की प्रक्रिया पुलिस से लेकर कोर्ट तक किस तरह लंबी चलती है।
सोमवार को एक दोषी को मिली सजा इसका उदाहरण है। मामला गांजा तस्करी का है, जिसमें कोर्ट ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए 500 रुपए का अर्थदंड लगाया है।
अर्थदंड नहीं देने पर उसे एक माह की जेल की सजा काटनी होगी। जबकि उसके पकड़े जाने से लेकर अब तक 17 साल बीत गए। मामला 23 जून, 2007 का है। उस दिन पुलिस ने सबौर के ममलखा के रहने वाले नरेश मंडल को गिरफ्तार किया था।
उस पर गांजा तस्करी का आरोप था। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि उसने नरेश मंडल को घटना वाले दिन 200 ग्राम गांजा के साथ गिरफ्तार किया था।
उसके पास से चिलम, लोहे की कतरनी और छोटी तख्ती बरामद हुई थी। मामले में सरकार की ओर से बहस में शामिल हुए नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेस (एनडीपीएस) एक्ट के विशेष लोक अभियोजक श्रीधर कुमार सिंह ने बताया कि नरेश मंडल को एडीजे 13 के कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 500 रुपए के अर्थदंड की सजा सुनयी। अर्थदंड नहीं देने पर उसे एम माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।







