मुगेंर:फलारी बाबा साल में 48 बार सुराही में जल भरकर पैदल ही देवघर जाते हैं । सुल्तानगंज से बाबा धाम देवघर तक पैदल कांवर यात्रा करने वाले जमुई जिले के राजू यादव को लोग फलारी बाबा भी कहते हैं।
फलाहारी बाबा ने 40 साल से अन्न नहीं खाया है । उनकी आस्था व तपस्या कुछ ऐसी है कि कांवरिया पथ पर लगभग सभी उन्हें पहचानते हैं। दरअसल श्रावणी मेला 2023 का शुभारंभ हो चुका है शिव भक्तों का हुजूम कंबारिय पथ पर चलने लगा है वही आज कई कांबरिया ने उत्तरवाहिनी गंगा घाट से जल भरा और बाबा धाम देवघर के लिए रवाना हो गए हैं।
वही कांबरिया पथ पर भोलेनाथ की भक्ति में लीन कई ऐसे कांबरिया हर साल दिखते है। जिनकी आस्था को लोग सलाम करते हैं। कांबरिया पथ पर ऐसे ही एक शिव भक्त पूरे साल चलते हैं जिन्हें लोग फलारी बाबा के नाम से जानते हैं। उनकी आस्था की कहानी जानकर आप भी दंग रह जाएंगे। दरअसल जमुई जिला के राजू यादव लगातार 40 वर्षों से बाबा धाम देवघर तक पैदल कावड़ यात्रा करते रहे हैं।
उनकी आस्था व तपस्या कुछ ऐसी है कि कांवरिया पथ पर लगभग सभी उन्हें पहचानते हैं और आदर करते हैं। राजू यादव को फलारी बाबा के नाम से भी लोग रास्ते में पुकारते हैं। वही सुराही में जल भरकर देवघर जा रहे हैं राजू यादव ने बताया कि वह पिछले 40 वर्षों से अन्न नहीं खाया है। वह फलाहार पर ही रहते हैं।
और रास्ते में पालक का पत्ता आदि खा लेते है। उन्होंने कहा कि अब शरीर ही ऐसा बन चुका है कि अगर वह अन्न खा ले तो प्राण जा सकते हैं। राजू यादव हर माह बाबा बैजनाथ को जल अर्पण करने पैदल निकलते हैं। वह महीने में प्रत्येक सप्ताह पैदल कांबर लेकर चलते हैं यानी एक महीने में वह चार बार कांबर लेकर जाते हैं।
उन्होंने कहा कि वे ऐसा पिछले 40 साल से कर रहे हैं और अपना जीवन ही अब शिव भक्ति के लिए समर्पित कर चुके हैं उन्होंने बताया कि वह अपनी ही उम्र से अंजान है। बस कांवर लेकर चले जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वह साल में 48 बार जरूर कावड़ यात्रा कर लेते हैं। और उन्होंने बताया कि उनकी अपनी आस्था इसके पीछे हैं। राजू यादव यानी फलारी बाबा बताते हैं कि बाबा भोले को मिट्टी के बर्तन में जल चढ़ाना सबसे शुभ माना जाता है। और जल ठंडा भी रहता है इसीलिए वह सुराही में ही जल लेकर जाते हैं कई लोग उन्हें सुराही बाबा भी कहते हैं।
और इस बार भी अपने दो सहयोगियों के साथ सुराही में जल भरकर बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह साल में एक बार पैदल ही नर्मदा से जल भरकर बाबा महाकाल उज्जैन भी जल अर्पण करते हैं।







