8 घंटे से बोरवेल में फंसे शिवम को बाहर निकाला, एनडीआरएफ- एसडीआरएफ का रेस्क्यू सफल

नालंदाः 150 फीट की गहराई वाले बोरवेल में गिरे शिवम को एनडीआरएफ– एसडीआरएफ की टीम ने सकुशल निकाला लिया है. शिवम को इलाज के लिए रेस्क्यू टीम ने अस्पताल पहुंचाया. शिवम 150 फीट के बोरवेल में 50 फीट की गहराई में सुबह 9 बजे से फंसा हुआ था. वह करीब 8 घंटे तक वह बोरवेल में फंसा रहा. साढ़े 5 घंटे तक रेस्क्यू आपरेशन चला. इस बीच जिला प्रशासन सीसीटीवी कैमरे की मदद से शिवम की गतिविधि पर नजर बनाये हुए रखा हुआ है. साथ ही शिवम तक ऑक्सीजन सप्लाई किया जा रहा था. जिले के नालंदा थाना क्षेत्र के कुल फतेहपुर स्थित छोटकी अहरा खंधा का मामला है.

पाइप के सहारे बोरवेल में ऑक्सीजन गैस पहुंचाया गया

बोरवेल में शिवम के गिरने की सूचना जैसे ही लोगों को मिली. गांव मे कोहराम मच गया. आसपास दर्जनों गांव के लोग का भीड़ उमड़ पड़ा. वहीं घटना की जानकारी स्थानीय थाना पुलिस द्वारा जिलाधिकारी को दिया गया. त्वरित रूप से पुलिस प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम घटना स्थल पर पहुंच राहत कार्य मे जुट गई. स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंच पाइप के सहारे बोरवेल में ऑक्सीजन गैस पहुंचाने का कार्य किया. साथ ही साथ शिवम को पानी और दूध भी पहुंचाया गया, लेकिन उसे पीने में बच्चा असमर्थ रहा.

खेलते-खेलते बोरवेल में गिरा शिवम

जानकारी के अनुसार कुल गांव के डोमन मांझी की पत्नी रेणु देवी सुबह 9 बजे के करीब अपने पुत्र शिवम मांझी के साथ छोटकी अहरी खंधा में करैले के खेत की निराई कोडाई करने पहुंची थी. शिवम पास के आम के पेड़ की छांव में खेलने लगा, तभी खेलते खेलते बगल के चुनु सिंह उर्फ चुहन सिंह के खेत में किये गए बोरवेल के गड्ढा में जा गिरा और करीब 22 मीटर अंदर चला गया. कुल गांव के रवि शेखर प्रसाद सिंह एवं संतन सिंह जो कि कुछ ही दूरी पर उसी ओर आ रहे थे, शिवम को बोरवेल में गिरते देख शोर मचाया. रवि शेखर सिंह ने बताया कि करीब 8 दिन पूर्व कुल गांव के चुहन सिंह के द्वारा बोरिंग कराया गया था, लेकिन कामयाब नहीं हुआ. जिसके बाद इसे ताड़ के खगड़े से ढक दिया गया था. जानकारी के अनुसार शिवम खेलने के दौरान खगड़े पर पैर रखा और बोरवेल में जा गिरा. ग्रामीणों के अनुसार आसपास मौजूद लोगों ने रस्सी के सहारे बच्चे को बोरवेल से निकालने का प्रयास किया, लेकिन शिवम करीब 15 फीट की दूरी पर आकर फिर से फिसल कर नीचे जा गिरा.

एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीम ने किया रेस्क्यू

शिवम को बोरवेल में गिरने की सूचना बाद जिला वरीय उपसमाहर्ता कृष्ण कांत उपाध्याय और अंचलाधिकारी सिलाव शम्भू मंडल तथा बीडीओ उदय कुमार करीब साढ़े 9 बजे ही पहुंच राहत बचाव में जुट गए. बच्चे को सकुशल बरामद के लिए तीन जेसीबी से बोरवेल के बगल में मिट्टी की खुदाई शुरू कर दिया. हालांकि एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की टीम करीब 1 बजे घटना स्थल पर पहुंची, और राहत बचाव का कार्य तेज करते हुए मिट्टी हटाने के लिये दो पोपलीन को भी लगाया गया. वहीं करीब 1 बजे अपराहन में पहुंचे एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की टीम के द्वारा शिवम को शुरुआत में रेस्क्यू के लिए रस्सी का सहारा लेकर काफी प्रयास किया गया. वहीं माइक्रोफोन के सहारे शिवम तक मां की आवाज को भी पहुंचाने का प्रयास किया गया. जिसके बाद लोहे की पाइप का सहारा लेकर प्रयास के बाद करीब एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की टीम ने कड़ी मशक्कत करते हुए 5 घंटे बाद सफलता प्राप्त कर लिया.

शिवम को स्वास्थ्य परीक्षण को लेकर भेजा गया बीम्स

शिवम को सकुशल बाहर निकलने के बाद मौके पर मौजूद प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ पुरूषोत्तम प्रियदर्शी ने शिवम का स्वास्थ्य प्रशिक्षण कर बताया कि बच्चा पूर्ण रूप से स्वस्थ है. बिशेष जांच हेतु बीम्स भेज दिया गया है. उप समाहर्ता कृष्ण कांत उपाध्याय ने बताया कि काफी मशक्कत कर सफलता पूर्वक बच्चे को शकुशल बाहर निकाल लिया गया है. इस कार्य मे एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की अग्रणी भूमिका रहा है. बताया कि स्थानीय ग्रामीण द्वारा जिस प्रकार बोरबेल को खुला छोड़ दिया गया है और घटना घटित हुई है. इसकी जांच पड़ताल कर कारबाई की जाएगी. एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की टीम ने ग्रामीणों को सहयोग के लिये किया प्रशंशा.

सूचना बाद एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ की टीम में एसडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट शाहरियार अख्तर,असिस्टेंट कमांडेंट जे पी प्रसाद, संतोष प्रसाद के नेतृत्व में 11 सदस्यीय टीम एवं एनडीआरएफ के 28 सदस्यीय टीम में डिप्टी कमांडेंट एसआई प्रदीप कुमार, हरेंद्र कुमार एवं कॉन्स्टेबल शामिल थे. बच्चे के शकुशल बाहर निकालने के बाद एसडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट शहरियार अख्तर ने कहा कि यहां का जिला प्रशासन एवं स्थानीय ग्रामीणों का पूरा पूरा सहयोग का नतीजा है कि काफी कम समय मे बच्चे को सही सलामत निकाला गया है. कहा कि हमलोग अनेकों प्रकार की तरकीब का इस्तेमाल करते हैं और उन्हीं तरकीब का इस्तेमाल कर बच्चा को बाहर निकालने में कामयाबी हासिल हुआ है.

 

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