आजादी के 76 साल बाद भी ग्रामीणों को नसीब नहीं हुई पक्की सड़क, ट्रेन के नीचे से पार होने को मजबूर ग्रामीण, रेलवे लाइन से घिरा हुआ है गांव

  • खाट के सहारे मरीजों को अस्पताल ले जाते हैं ग्रामीण

बोकारोः जिला मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर दूर स्थित हैसाबातु पंचायत अंतर्गत आने वाले हिरटांड गांव को आजादी के 76 साल बाद भी ग्रामीणों को पक्की सड़क नसीब नहीं हुई. यहां बीएसएल के द्वारा विस्थापित लोगों को प्लांट बनाने के दौरान बसाया गया था. लेकिन ये भोले भाले ग्रामीण क्या जाने की आने वाले समय में इन्हें घर से निकलना मुश्किल हो जाएगा.

आजादी के 76 साल बाद भी ग्रामीणों को नसीब नहीं हुई पक्की सड़क

तीनों तरफ रेलवे लाइन से घिरा है गांव

इस गांव में बसे ग्रामीण आज रास्ते के समस्या से जूझ रहे हैं. ये गांव तीनों तरफ से रेलवे लाइन से घिरा हुआ है. इस गांव में आने जाने के सिर्फ एक कच्चा रास्ते है. जो मुख्य सड़क से 3 किलोमीटर अंदर है और वो भी पगडंडी की तरह है. जिसमें बरसात के समय कीचड़ के कारण लगभग रास्ता बंद होने जैसा हो जाता है. यहां के ग्रामीण गिरते पड़ते हुए जान को जोखिम मे डालकर आना जाना करते हैं.

ट्रेन के नीचे से पार होने को है मजबूर

इस गांव में एक रास्ता और है जो बहुत ही जोखिम भरा है, वो है रेलवे लाइन को पार करके जाना, लेकिन रेल फाटक नहीं है और हमेशा बीएसएल प्लांट जाने वाला मालगाड़ी घंटों खड़ी रहती है. जिस कारण ग्रामीण युवा, बूढ़े, स्कूली बच्चे ट्रेन के नीचे से गुजरने को मजबूर है. वहीं एक ग्रामीण मजदूर रोहन मांझी का कहना है कि ट्रेन बहुत देर से खड़ी थी हम काम करके आए और बहुत इंतजार किया. जब ट्रेन नही गई तो हम ट्रेन के नीचे से पार होने लगे कि हाथ गंवा बैठे. ये घटना इसी साल में मेरे साथ हुआ.

स्कूल जाने में होती है परेशानी

ग्रामीण लक्ष्मी कुमारी ने बताया की हमलोग को जब स्कूल जाने का समय होता है तो ट्रेन खड़ी रहती है. जब परीक्षा का समय रहता है तो जान जोखिम मे डालकर ट्रेन के नीचे से जाना पड़ता है. स्कूल जाने मे लेट भी हो जाता है घंटों इंतजार करना पड़ता है. अगर कोई बीमार पड़ता है तो ले जाने में बहुत दिक्कत होती है.

काम पर जाने में होती है परेशानी

वहीं ग्रामीण पुष्पा देवी ने बताया कि हम मजदूरी करने जाते है. तो बहुत लेट हो जाते है. जिस वजह से गाली भी सुनना पड़ जाता है. यहां एक गाड़ी जाती है तो दूसरा आकार खड़ी हो जाती है. हम लोग डर के कारण अपने बच्चे को चार दिन घर में रखते है. तो एक दिन स्कूल भेजते है. हम लोग चारो ओर से रेलवे लाइन से घिरे हुए हैं.

खाट के सहारे मरीजों को अस्पताल ले जाते हैं

ग्रामीण सुमन ठाकुर ने बताया कि यहां गाड़ी आकार खड़ी हो जाती है. जिस कारण स्कूल नहीं जा पाते हैं और बच्चे लोग मूर्ख बन कर रहते है. अपनी समस्या जब मुखिया को बताते है तो बोलते है, जाकर रेलवे को बोलो , हमारे गांव मे जब कोई बीमार पड़ता है, तो इलाज के लिए ले जाने में बहुत दिक्कत होती है. खाट मे बांध कर ले जाना पड़ता है. जिस कारण दो व्यक्ति की मौत हो गई. कई ग्रामीण के कीचड़ मे फंस कर हाथ पैर भी टूटे है.

रिपोर्टः चुमन कुमार

 

 

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