राज्यपाल ने मुंगेर में की छठे एकेडमिक सीनेट बैठक की अध्यक्षता

मुंगेर : बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर सड़क मार्ग से आज मुंगेर पहुंचे। जहां मुंगेर यूनिवर्सिटी में उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। उसके बाद वे मुंगेर यूनिवर्सिटी के छठे एकेडमिक सीनेट बैठक अध्यक्षता कुलाधिपति राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर कर रहे हैं। बैठक में सीनेट मेंबर के अलावा कई विधायक और एमएलसी मौजूद रहे। कुलाधिपति और कुलपति सहित राज्यपाल के प्रधान सचिव ने दीप जलाकर सीनेट की बैठक का शुभारंभ किया। इसके बाद राज्यपाल मुंगेर योगाश्रम जाएंगे। पूरा यूनिवर्सिटी पुलिस छावनी में तब्दील हुआ। आयुक्त, डीआईजी, डीएम और एसपी के अलावा पुलिस बल के सारे पदाधिकारी मौजूद हैं। वहीं मुंगेर यूनिवर्सिटी के सारे पदाधिकारी भी यूनिवर्सिटी में मौजूद हैं। इसको लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किया गया है।

कार्यक्रम में सर्वप्रथम कुलपति ने कुलाधिपति को अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह दिया। जिसके बाद डीजे कॉलेज के प्राचार्य प्रो. प्रभात कुमार ने प्रधान सचिव तथा डीएसडब्लू डॉ. भवेशचंद्र पांडेय ने राजभवन के स्पेशल अधिकारी प्रीतेश कुमार को अंगवस्त्र प्रदान किया। वहीं जेआरएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. देवराज सुमन ने कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रास बिहारी प्रसाद सिंह को अंगवस्त व प्रीतक चिन्ह प्रदान किया। जिसके बाद बैठक को विधिवत आरंभ किया गया।

बता दें कि दो माह में विश्वविद्यालय के लिए भवन का निर्माण कार्य आरंभ होगा। शिक्षा हमारे विकास की रीढ़ होती है। जब-जब कहीं शिक्षा का स्तर गिरा है। वहां-वहां समाज का विकास स्थिर हुआ है। इसलिए आज हमें वाट आवर इंडस्ट्री नीड नहीं, बल्कि वाट आवर सोसाइटी नीडस विचार वाली शिक्षा की जरूर है। तभी हम एक मजबूत समाज का विकास कर सकते हैं। क्योंकि हमारी इंडस्ट्री को क्या चाहिए, वह अपने हिसाब से जरूरतों को पूरा कर लेती है। लेकिन समाज को जिस शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है। वह अपने बच्चों को देने की जिम्मेदारी हमारे विश्वविद्यालयों की है। उक्त बातें कुलाधिपति सह राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लकर ने बुधवार को मुंगेर विश्वविद्यालय में आयोजित सीनेट (एकेडमिक) बैठक के दौरान कही।

कुलाधिपति ने सीनेट (एकेडमिक) बैठक के दौरान नई शिक्षा नीति 2020 पर जोर देते हुए कहा कि यह एक परिवर्तन का दौर है। जिसमें हमें मिलकर अपनी सहभागिता देनी है, तभी हम अपने बच्चों को कह पायेंगे की नई शिक्षा नीति-2020 के समय हमारा भी योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति को पूरे देश के साथ बिहार ने भी अपनाया है। जिसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री ने भी इसे एक सराहा है और कहा है कि नई शिक्षा नीति 2020 में में राज्य सरकार पूरी तरह साथ है।

कुलाधिपति ने कहा कि जिस समय देश में ब्रिटिश का आगमन हुआ। उस समय 1889 में एक सर्वे ब्रिटिश द्वारा कराया गया। उस सर्वे का रिर्पोट 1895 में आया। जिसके अनुसार देश में साक्षरता का दर 85 प्रतिशत था। लेकिन 1947 में जब ब्रिटिश देश से गए तो 1948 में एक और सर्वे देश में हुआ। जिसमें हमारी शिक्षा का प्रतिशत लगभग 24 प्रतिशत था। जो हमारी शिक्षा का गिरा हुआ स्तर है। वह उनके कारण ही है।

उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में नालंदा विश्वविद्यालय का जो नाम है। वह बिहार की गरिमा को प्रदर्शित करने के लिए काफी है। इसलिए हमारी शिक्षा व्यवस्था में क्या कमियां है, क्या परेशानियां है। उससे बड़ा सवाल यह है कि अपने शिक्षा स्तर को बढ़ाने के लिए हमारा विचार क्या है। इसलिए मैंने आरंभ में कहा कि वाट इंडस्ट्री नीड नहीं, बल्कि वाट सोसाइटी नीड विचार वाली शिक्षा आज के समय की जरूरत है।

अम्रितेश सिन्हा की रिपोर्ट

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