औरंगाबाद : जी हां… बिहार के अति नक्सल प्रभावित जिला औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र की हम बात कर रहे हैं। पहले की तस्वीर और आज की तस्वीरों में साफ अंतर नजर आता है। पहले जहां अफीम की खेती होती थी, वहां आज सरसों के पीले फूल लहलहा रहें हैं। जहां स्कूल की इमारतें ध्वस्त थी अब स्कूल भवन सीना तानकर खड़े हैं, बच्चे पड़ रहें हैं। जंगलों तक सुगम आवागम के लिए सड़क है। ग्रामीण अब अपने क्षेत्र में विकास चाह रहे है।
दरअसल, ये तस्वीरें औरंगाबाद के बेहद नक्सलग्रस्त देव के इलाके की है, जो विश्वप्रसिद्ध त्रेतायुगीन सूर्य मंदिर के लिए विख्यात है। इस इलाके में विकास की किरण पहुंचने के बाबजूद लोगों में अच्छी खासी नाराजगी है। नाराजगी सरकार से नही बल्कि सरकार के नुमाइंदे से है। नाराजगी और आक्रोश इतना की जनता कह रही है की उन्हें एक बार फिर मोदी सरकार तो चाहिए, लेकिन अभी वाला नुमाइंदा नही चाहिए। मोदी मजबूरी है लेकिन नुमाइंदगी करने वाले उम्मीदवार को बदलो, नहीं तो वोट नही देंगे। जनता के पास नुमाइंदा बनने लायक उम्मीदवारों के नाम भी हैं।
आपको बता दें कि जैसे जैसे लोकसभा चुनाव की तिथि निकट आ रहे हैं। वही जनता भी अब खुलकर बोलने लगी है। आज हम आपको रूबरू करा रहे है औरंगाबाद की अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र देव की। जनता से जिसे एक दशक पहले दुनिया इस क्षेत्र को लाल गलियारों की नाम से जाना जाता था। आइए वहां की जनता का मिजाज सुनते हैं क्या है।
दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट


