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JTET Language Row: भोजपुरी, मगही और अंगिका पर बंटी राय, अंतिम फैसला अब CM Hemant Soren के हाथ

 

झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने के मुद्दे पर बनी उच्चस्तरीय समिति में मतभेद उभरकर सामने आए हैं। अंतिम फैसला अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लेंगे।


JTET Language Row रांचीः झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने के मुद्दे पर बनी उच्चस्तरीय समिति की अंतिम बैठक में भी सर्वसम्मति नहीं बन सकी। बुधवार को हुई बैठक में मंत्रियों के बीच इस विषय पर स्पष्ट मतभेद देखने को मिले। अब इस पूरे विवाद पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को करना है।


Key Highlights

जेटेट में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने पर समिति में सहमति नहीं बनी।

चार मंत्रियों ने इन भाषाओं को शामिल करने का विरोध किया।

तीन मंत्रियों ने क्षेत्रीय भाषाओं को सूची में जोड़ने का समर्थन किया।

उच्चस्तरीय समिति की अंतिम बैठक संपन्न, रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी।

अंतिम निर्णय अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के स्तर पर होगा।


 JTET Language Row: समिति में बंटी राय, चार मंत्री विरोध में

सूत्रों के अनुसार समिति में शामिल चार मंत्रियों ने भोजपुरी, मगही और अंगिका को जेटेट की भाषा सूची में शामिल करने का विरोध किया। उनका तर्क था कि इन भाषाओं का व्यापक प्रभाव कई अन्य राज्यों में भी है और इन्हें झारखंड की मूल क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

विरोध करने वाले पक्ष का मानना है कि झारखंड की स्थानीय और आदिवासी भाषाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने हिंदी को सूची में बनाए रखने की भी वकालत की।

JTET Language Row: तीन मंत्रियों ने किया समर्थन

दूसरी ओर समिति के तीन सदस्यों ने भोजपुरी, मगही और अंगिका को जेटेट में शामिल करने का समर्थन किया। उनका कहना था कि इन भाषाओं को बोलने और समझने वाली आबादी झारखंड में बड़ी संख्या में मौजूद है, इसलिए इन्हें परीक्षा की भाषा सूची से बाहर रखना उचित नहीं होगा।

समर्थन करने वाले सदस्यों ने यह भी तर्क दिया कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों की भाषाई विविधता को देखते हुए सभी प्रमुख भाषाओं को समान अवसर मिलना चाहिए।

JTET Language Row: उच्चस्तरीय समिति की बैठक के बाद सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद समिति ने अपने विचारों और सुझावों को संकलित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। समिति की रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी, जिसमें समर्थन और विरोध दोनों पक्षों की राय शामिल होगी।

सरकार अब सभी पहलुओं पर विचार कर अंतिम निर्णय लेगी। चूंकि मामला भाषा, शिक्षा और क्षेत्रीय पहचान से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

JTET Language Row:  मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी निगाहें

जेटेट भाषा विवाद पिछले कई महीनों से झारखंड की राजनीति और शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, भाषा प्रेमियों और राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे पर अलग-अलग राय व्यक्त की है।

अब सभी की नजर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर है, जिनके निर्णय से यह तय होगा कि आगामी जेटेट परीक्षा में भोजपुरी, मगही और अंगिका को स्थान मिलेगा या नहीं। मुख्यमंत्री के फैसले के बाद ही इस लंबे समय से चल रहे विवाद पर विराम लगने की संभावना है।

 

 

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