Breaking : सीएम योगी बोले – शिक्षक ट्रेड यूनियन के पार्ट नहीं

डिजीटल डेस्क : Breakingसीएम योगी बोले – शिक्षक ट्रेड यूनियन के पार्ट नहीं। गोरखपुर में बृहस्पतिवार अपराह्न शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों को अपने पेशेगत गरिमा के अनुरूप आचरण को आत्मसात करके देश और समाज को दिशा देने को कहा।

सीएम योगी ने साफ कहा कि – ‘शिक्षक का व्यक्तित्व भी और कृतित्व भी राष्ट्र निर्माता के रूप में झलकना चाहिए। एक शिक्षक ट्रेड यूनियन का पार्ट नहीं हो सकता’।

मुख्यमंत्री बोले – अपनी मांगों का ज्ञापन दें, भीख ना मांगें

‘ट्रेड यूनियन का पार्ट न बनकर शिक्षक अपनी मांग को लोकतांत्रिक तरीके से ज्ञापन के माध्यम से रख सकते हैं। आज तो डिजीटल माध्यम है।

आपकी समस्या और मांग का ज्ञापन मुख्यमंत्री से लेकर संबंधित अधिकारियों तक डिजीटल तरीके से पहुंचे तो किसी को कानोंकान खबर भी नहीं होगी और आपका काम होगा। अपने मुद्दों को ज्ञापन में सरलता से लिखिए।

आपका वह ज्ञापन केवल ज्ञापन नहीं बल्कि आदेश होगा। शिक्षक को भीख मांगना शोभा नहीं देता, ज्ञापन से आदेश दीजिए। याद रखिए, भीख मांग करके दान नहीं दिया जाता। पुरुषार्थ से संचित आय से ही दान होता है’।

सीएम योगी – विकसित भारत में जुटें शिक्षक, पीढ़ियां याद रखेंगी

सीएम योगी ने आगे कहा कि राजकीय स्कूलों के शिक्षक बेसिक से माध्यमिक तक वाले सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत संकल्प को साकार करने में जुटें।

कारण कि विकसित भारत का सपना किसी सरकार या पार्टी विशेष का नहीं है। यह भारत का और 140 करोड़ भारतीयों का संकल्प है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपने यहां साकार बेहतर शिक्षण माहौल बनाएं ताकि तमाम स्किलों से युक्त नई पीढ़ी तैयार हो तो फिर विकसित भारत बनने पर तब की पीढ़ी मौजूदा शिक्षकों के अवदान और योगदान के गुण गाएंगी।

आप देश के भविष्य निर्माता हैं। इसलिए इनोवेशन की ओर ध्यान दीजिए। कोई नया कार्य नए तरीके से करिए, अच्छा लगना चाहिए। बच्चों को पढ़ाने के आसान से आसान तरीके निकालने का निरंतर प्रयास हो, नवाचार पर काम हो।

गोरखपुर में शिक्षक दिवस समारोह में सीएम योगी
गोरखपुर में शिक्षक दिवस समारोह में सीएम योगी

संशय और शक की निगाह से देखा जा रहा शिक्षा जगत

इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को झिंझोड़ा और समझाते हुए कहा कि  देखना होगा कि क्यों शिक्षा जगत को संशय और शक की निगाहों से देखा जा रहा है। एक नई चुनौती हम सबके सामने है।

30-35 साल पहले राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की भरमार होती थी लेकिन आज विद्यार्थियों की वही भरमार कानवेंट और प्राइवेट स्कूलों में देखने को मिल रही है।

जिन सरकारी विद्यालयों ने अपने यहां के पठन-पाठन का माहौल सही रखा है, वहां आज भी विद्यार्थी बड़ी संख्या में हैं लेकिन जहां नहीं है वहीं पर कमी है। इसके लिए आत्मनिर्भरता वाले फार्मूले को अपनाना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत की बात की है तो प्रदेश में हम क्या आत्मनिर्भरता की ओर नहीं बढ़ सकते। जब पूरे दिन की स्कूलिंग खत्म हो जाए और सारे विद्यार्थी अपने घरों को चले तो फिर शिक्षक अपने प्रधानाचार्य के साथ मिलकर अगले दिन की कार्ययोजना बनाएं तो कितना अच्छा होगा। अभिभावकों से संवाद का कार्यक्रम बनाएं।

राज्य सरकार नए दौर की जरूरतों पर खरा उतरने वाले नए स्कूलों को शुरू करने पर लगातार काम कर रही ताकि प्रदेश का कोई भी बच्चा शिक्षण की मूल धारा से न छूट पाए। इसमें शिक्षकों को भी अहम भूमिका और भागीदारी है।

सर्टिफिकेट लेने से ज्ञान नहीं आता लेकिन श्रद्धावान बनने के लिए हमे भी परिश्रम और साधना करनी पड़ती है। कठिन मार्गों से चलना होता है एवं इसी साधना पर शिक्षकों को शिष्य पूजते हैं।

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