रांची: एक दिनों पहले केंद्रीय मंत्री और झारखंड के भाजपा प्रभारी शिवराज सिंह चौहान ने आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा की संभावित जीत के बाद राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यह कदम राज्य की जनसांख्यिकी में बदलाव के लिए आवश्यक है, जिसमें आदिवासी आबादी की संख्या में कमी आई है। चौहान ने वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर अवैध वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया और दावा किया कि अवैध अप्रवासी राज्य की आदिवासी आबादी को प्रभावित कर रहे हैं।
इस बीच, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने भाजपा की इस घोषणा को ध्रुवीकरण का एक प्रयास बताया। जेएमएम की राज्यसभा सांसद डॉ. महुआ माझी ने कहा कि भाजपा केवल धर्म के मुद्दों को उठाकर चुनावी लाभ लेने की कोशिश कर रही है और विकास के मुद्दों से ध्यान भटका रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड का कोयला बकाया अभी भी केंद्र सरकार द्वारा नहीं दिया गया है, जो राज्य के विकास में बाधा डाल रहा है।
डॉ. माझी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति सीमावर्ती क्षेत्र से आता है, तो वह सीधे झारखंड में नहीं आ सकता। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री पर तंज करते हुए कहा कि पहले उन्हें अपने राज्य को सुरक्षित करना चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने जेएमएम के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि एनआरसी का मुद्दा झारखंड की पहचान की रक्षा और जल, जंगल, और जमीन के संरक्षण का है। उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की जनसांख्यिकीय संरचना तेजी से बदल रही है और यदि इसे रोका नहीं गया, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी।
इस प्रकार, झारखंड के आगामी चुनावों में एनआरसी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है, जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस का दौर चल रहा है।
