डिजीटल डेस्क : Big Decision – चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र की डीजीपी को हटाया। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी कार्रवाई करते हुए चुनाव आयोग ने राज्य की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रश्मि शुक्ला को हटाने का आदेश दिया है।
कांग्रेस समेत राज्य के कई प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से रश्मि के खिलाफ शिकायत किए जाने के बाद आयोग ने उनका तत्काल प्रभाव से ट्रांसफर कर दिया। साथ ही मुख्य सचिव को यह निर्देश भी दिया कि वे कैडर में अगले सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को उनका कार्यभार सौंपें।
विपक्षी दलों की शिकायतों पर चुनाव आयोग का एक्शन
कांग्रेस पार्टी ने बीते 24 सितंबर और 4 अक्टूबर को ही पत्र के जरिए डीजीपी रश्मि शुक्ला को हटाने की मांग की थी। साथ ही पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने 27 सितंबर को मुंबई आए चुनाव अधिकारियों के समक्ष इस मांग को दोहराया भी था। अब कांग्रेस और अन्य दलों की ओर से की गई शिकायतों पर एक्शन लेते हुए चुनाव आयोग ने कार्रवाई की।
चुनाव आयोग के सोमवार को जारी आदेश में मुख्य सचिव को महाराष्ट्र के नए डीजीपी के पद पर नियुक्ति के लिए कल मंगलवार (दोपहर 1 बजे) तक 3 आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजने का भी निर्देश दिया गया है।
बताया जा रहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने पहले की गई समीक्षा बैठकों और राज्य में विधानसभा चुनावों की घोषणा के दौरान अधिकारियों को न सिर्फ निष्पक्ष रहने की चेतावनी दी थी, बल्कि अपने कर्तव्यों का पालन करते समय न्यूट्रल रहने का सुझाव दिया था।

महाराष्ट्र कांग्रेस ने चुनाव आयोग के इस फैसले और एक्शन का किया स्वागत…
चुनाव आयोग के ताजा फैसले का महाराष्ट्र में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने स्वागत किया है। कांग्रेस के ओबीसी नेता और महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार ने सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट में कहा कि चुनाव आयोग का डीजीपी के ट्रांसफर के फैसले का हम स्वागत करते हैं। इस फैसले से यह साफ हो गया कि गठबंधन की यह सरकार बेईमान है।
बता दें कि कांग्रेस की महाराष्ट्र यूनिट के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने पिछले दिनों आयोग से 20 नवंबर को होने वाले चुनावों के मद्देनजर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रश्मि शुक्ला को हटाने की मांग की थी।
उन्होंने आयोग को लिखे अपने पत्र में आरोप लगाया कि वह एक विवादास्पद अधिकारी हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का पक्ष लिया और उनके पद पर बने रहने से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चुनाव कराने पर संदेह पैदा होगा।
Highlights

