हिंदू धर्मावलंबियों में रोष
गया : बिहार के सभी मंदिरों को अब टैक्स देना होगा. राज्य के सार्वजनिक मंदिरों के निबंधन के लिए बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड व्यापक अभियान चला रहा है. एक दिसंबर से इसे तेज किया जाएगा. इसमें बोर्ड के अलावा आम लोग भी हिस्सा ले सकते हैं. मंदिरों के निबंधन के लिए सूचना के साथ संबंधित कागजात भी मुहैया कराना होगा. धार्मिक न्यास बोर्ड उक्त कागजातों की जांच कर उसका निबंधन करेगा. बिहार सरकार के इस फैसले का कांग्रेस ने विरोध जताया है. कांग्रेस ने इसे नीतीश सरकार का तुगलकी फरमान बताया है.
अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सदस्य सह क्षेत्रीय प्रवक्ता बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी प्रो विजय कुमार मिठू ने कहा कि अभी तक सम्पूर्ण देश के सभी धार्मिक संस्थान मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा के आमदनी से सरकार किसी प्रकार की टैक्स नहीं लेती है, जबकि इनमें से कई धार्मिक स्थल अपने आमदनी को शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान देते हैं. बड़ी बात यह है कि सभी धार्मिक न्यास बोर्ड स्कूल, कॉलेज, अस्पताल खोल कर निःशुल्क सेवा दे रहे हैं.
उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के मंदिरों की आमदनी में से चार प्रतिशत टैक्स लेने के बजाय उन्हें यह निर्देश देती कि मंदिर के मेंटेनेस के बाद बची राशि को शिक्षा एवं स्वास्थ के क्षेत्र में खर्च करे, लेकिन ऐसा उन्होंने नहीं कहा. धार्मिक न्यास बोर्ड के इस तुगलकी फरमान से हिंदू धर्मावलंबियों में भी भयानक रोष है।
बैठक में क्षेत्रीय प्रवक्ता बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी प्रो. विजय कुमार मिठू, पूर्व सांसद रंजीत सिंह उर्फ रंग बाबू, पूर्व विधायक डॉ. युगल किशोर प्रसाद, मो. खान अली, जिला उपाध्यक्ष युगल किशोर सिंह, मो. खैरुद्दीन, विद्या शर्मा, अमरजीत कुमार, टिंकू गिरी, ओंकार नाथ सिंह, सुभाष चन्द्र, विनोद उपाध्याय, राजेश्वर पासवान, मो. असरफ इमाम, मो. अजहरुद्दीन, मो. ताजुद्दीन, सुरेन्द्र मांझी, अरुण कुमार पासवान उपस्थित रहे.
रिपोर्ट : राममूर्ति पाठक
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